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		<title>मदर्स डे विशेष : पिता का साया उठने के बाद मां ने संघर्षों से गढ़ी बेटे की सफलता की कहानी, खेत बेचकर मां ने सींचा भविष्य, बेटा सूबेदार बनकर लौटा तो गर्व से ऊंचा हुआ सिर&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Lakheshwar Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 May 2026 11:24:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Special Reports]]></category>
		<category><![CDATA[Chhattisgarh]]></category>
		<category><![CDATA[Janjgir–Champa]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; मदर्स डे विशेष : पिता का साया उठने के बाद मां ने संघर्षों से गढ़ी बेटे की सफलता की कहानी, खेत बेचकर मां ने सींचा भविष्य, बेटा सूबेदार बनकर लौटा तो गर्व से ऊंचा हुआ सिर जांजगीर : कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात भी रास्ता छोड़ देते हैं। सक्ती जिले &#8230;</p>
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<ul>
<li><strong>मदर्स डे विशेष : पिता का साया उठने के बाद मां ने संघर्षों से गढ़ी बेटे की सफलता की कहानी, </strong></li>
<li><strong>खेत बेचकर मां ने सींचा भविष्य, बेटा सूबेदार बनकर लौटा तो गर्व से ऊंचा हुआ सिर</strong></li>
</ul>
<p>जांजगीर : कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात भी रास्ता छोड़ देते हैं। सक्ती जिले के ग्राम धमनी की रहने वाली सुरती बाई ने यह सच कर दिखाया। पति के निधन के बाद छह बेटियों और एक छोटे बेटे की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। खुद अशिक्षित होने के बावजूद उन्होंने अपने इकलौते बेटे पुष्पेंद्रराज के सपनों को टूटने नहीं दिया। संघर्ष, त्याग और मेहनत की बदौलत आज वही बेटा छत्तीसगढ़ पुलिस में सूबेदार बनकर गांव लौटा तो पूरे गांव का सिर गर्व से ऊंचा हो गया। गांव की तंग गलियों से निकलकर पुलिस सेवा तक पहुंचने वाले पुष्पेंद्रराज की सफलता के पीछे उनकी मां की तपस्या छिपी है। जब पुष्पेंद्र पहली बार सूबेदार की वर्दी पहनकर गांव पहुंचे, तो ढोल-नगाड़ों और भारत माता की जय के नारों के बीच स्वागत हुआ। लेकिन सबसे ज्यादा चमक उस मां की आंखों में थी जिसने अपने बेटे के भविष्य के लिए सबकुछ दांव पर लगा दिया। मां के संघर्ष और बेटे की मेहनत रंग लाई। कठिन परिश्रम के बाद पुष्पेंद्रराज का चयन छत्तीसगढ़ पुलिस में सूबेदार पद पर हुआ। आज मदर्स डे पर सुरती बाई की कहानी सिर्फ एक मां के त्याग की मिसाल नहीं है, बल्कि यह उन तमाम महिलाओं के साहस की कहानी भी है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने बच्चों के सपनों को टूटने नहीं देतीं।</p>
<p>पति के बाद परिवार की पूरी िजम्मेदारी संभाली सुरती बाई के पति छोटेलाल खटर्जी का निधन वर्ष 2000 में हो गया था। उस समय पुष्पेंद्र महज चार साल के थे। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर चलाने से लेकर बच्चों की परवरिश तक की पूरी जिम्मेदारी सुरती बाई पर आ गई। आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। बंटवारे में मिली पुश्तैनी जमीन पर खेती कर उन्होंने परिवार संभालने की कोशिश की, लेकिन उससे गुजारा नहीं हो पा रहा था। हालात इतने कठिन थे कि कई बार दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो जाता था, लेकिन मां ने बेटी व बेटे की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी। पढ़ाई में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए उन्होंने अपनी हिस्से की जमीन तक बेच दी।</p>
<p>बेटा अफसर बन गया, अब जिंदगी सफल लगती सुरती बाई कहती हैं कि पति के जाने के बाद जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी। कई बार हालात ने तोड़ने की कोशिश की, लेकिन बेटे और बेटियों का चेहरा देखकर हिम्मत मिलती रही। पुष्पेंद्रराज ने बताया कि उनके संघर्ष को देखकर मां अक्सर परेशान हो जाया करती थीं। जब सूबेदार चयन प्रक्रिया में देरी हुई, तब पूरा परिवार मानसिक रूप से टूट गया था। उस दौरान मां की तबीयत भी खराब हुई, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज वह गर्व से कहती हैं कि जब बेटा सूबेदार बन गया है, तो लगता है कि उनका वर्षों का संघर्ष सफल हो गया।</p>
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		<title>विश्वप्रसिद्ध टाइटैनिक हादसे से जुड़ी जांजगीर की याद, मिस एनी फंक ने जगाई शिक्षा की अलख, त्याग और मानवता की बनी अमर मिसाल&#8230;</title>
		<link>https://jcn24.in/miss-annie-funk-awakened-the-memory-of-janjgir-related-to-the-world-famous-titanic-disaster-and-became-an-immortal-example-of-sacrifice-for-education-and-humanity/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Lakheshwar Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 02:32:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Knowledge & Career]]></category>
		<category><![CDATA[Chhattisgarh]]></category>
		<category><![CDATA[International News]]></category>
		<category><![CDATA[Janjgir–Champa]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>टाइटैनिक हादसे से जुड़ी जांजगीर की याद, मिस एनी फंक ने जगाई शिक्षा की अलख, त्याग और मानवता की बनी अमर मिसाल&#8230; जांजगीर चांपा:- 15 अप्रैल 1912 को घटित विश्व प्रसिद्ध टाइटैनिक हादसा की त्रासदी सिर्फ एक समुद्री हादसा नहीं थी, बल्कि कई अनसुनी कहानियों को अपने साथ समेटे हुए है, इन्हीं कहानियों में से &#8230;</p>
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<li dir="auto"><strong>टाइटैनिक हादसे से जुड़ी जांजगीर की याद, मिस एनी फंक ने जगाई शिक्षा की अलख, त्याग और मानवता की बनी अमर मिसाल&#8230;</strong></li>
</ul>
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<div dir="auto">जांजगीर चांपा:- 15 अप्रैल 1912 को घटित विश्व प्रसिद्ध टाइटैनिक हादसा की त्रासदी सिर्फ एक समुद्री हादसा नहीं थी, बल्कि कई अनसुनी कहानियों को अपने साथ समेटे हुए है, इन्हीं कहानियों में से एक है जांजगीर- चांपा से जुड़ी मिस एनी क्लेमर फंक की, जिन्होंने न सिर्फ इस क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाई, बल्कि अपने जीवन के अंतिम क्षणों में अद्भुत त्याग और मानवता की मिसाल भी पेश की है.</div>
<div dir="auto">
<div dir="auto">अमेरिका के पेंसिल्वेनिया की रहने वाली एनी क्लेमर फंक दिसंबर 1906 में भारत आईं, वे पहली मेनोनाइट महिला मिशनरी थीं, जिनका उद्देश्य समाज में शिक्षा का प्रसार करना था, उस समय भारत, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में बालिका शिक्षा की स्थिति बेहद कमजोर थी, ऐसे दौर में उन्होंने जांजगीर-चांपा के भीमा तालाब के पास 1907 में एक किराए के मकान में मात्र 17-18 लड़कियों के साथ एक गर्ल्स स्कूल की शुरुआत की, यह क्षेत्र की पहली ऐसी पहल थी, जहां बेटियों को शिक्षा देने का कार्य शुरू हुआ, उन्होंने 1908 से 1912 तक निःस्वार्थ भाव से यहां अध्यापन किया और घर-घर जाकर लोगों को बेटियों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया.</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">फरवरी 1912 में उन्हें सूचना मिली कि उनकी मां सुसन्ना क्लेमर फंक गंभीर रूप से बीमार हैं, मां से मिलने की बेचैनी में वे जांजगीर नैला रेलवे स्टेशन से ट्रेन से मुंबई, फिर इंग्लैंड पहुंचीं, वहां कोयला मजदूरों की हड़ताल के कारण उनका निर्धारित जहाज रद्द हो गया, ऐसे में उन्होंने 13 पौंड अतिरिक्त किराया देकर टाइटैनिक के द्वितीय श्रेणी का टिकट (नंबर 237671) लिया और 10 अप्रैल 1912 को साउथम्प्टन से अमेरिका के लिए रवाना हो गईं.</div>
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<div dir="auto">जहाज पर ही मनाया अपना अंतिम जन्मदिन..</div>
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<div dir="auto">टाइटैनिक यात्रा के दौरान 12 अप्रैल 1912 को उन्होंने अपना 38वां जन्मदिन जहाज पर ही खुशी-खुशी मनाया, लेकिन यह उनका अंतिम जन्मदिन साबित हुआ,14-15 अप्रैल की दरमियानी रात टाइटैनिक एक विशाल हिमखंड से टकरा गया, जिससे जहाज में दरार आ गई और कुछ ही घंटों में वह अटलांटिक महासागर में डूब गया, इस भीषण हादसे में करीब 1517 लोगों की जान चली गई, जिनमें मिस फंक भी शामिल थीं.इसकी जानकारी टाइटैनिक हादसे में जान गवाने वाले यात्रियों के बारे में जारी किए गए दस्तावेजों से मिली.</div>
<div dir="auto"></div>
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<div dir="auto"> जांजगीर के फंक मेमोरियल स्कूल के प्राचार्य सरोजनी सिंग ने बताया की 15 अप्रैल 1912 की अंधेरी रात में जब टाइटेनिक नार्थ अटलांटिक महासागर में डूब रहा था तब उसमें सवार लोगों को बचाने के लिए जहाज के कप्तान एवं कर्मचारी यात्रियों की सुरक्षा की पूर्ण कोशिश में लग गए एवं जहाज में उपलब्ध जीवन रक्षक नौकाओं को समुद्र में उतारा जाने लगा, किस्मत से मिस फंक को अंतिम लाइफ बोट में सीट मिल गई वह अपने सीट में बैठने ही वाली थी की लेकिन एक बच्चे को सीट नहीं मिली थी और उस बच्चें की मां को सीट मिल गई थी. मां और उसके बच्चे बिछड़ न जाए इसलिए मिस फंक ने अपना लाइफ बोट का सीट त्याग दिया और स्वयं डूबते हुए टाईटेनिक में रुक गई. मिस एनी क्लेमर फंक की इस त्याग और बलिदान ने एक मां को अपने बच्चों से जुदा होने से बचा लिया जांजगीर की इस टाईटेनिक यात्री का बलिदान जांजगीर एवं पूरे विश्व के लिए आदर्श एवं गौरव की बात है, जिसे कोई भूला न पायेगा. उनका यह त्याग आज भी मानवता की एक मिसाल के रूप में याद किया जाता है.</div>
</div>
</div>
<div dir="auto"><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-5149" src="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/04/Videoshot_20260414_202459-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" srcset="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/04/Videoshot_20260414_202459-300x169.jpg 300w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/04/Videoshot_20260414_202459-1024x576.jpg 1024w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/04/Videoshot_20260414_202459-768x432.jpg 768w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/04/Videoshot_20260414_202459-1536x864.jpg 1536w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/04/Videoshot_20260414_202459-390x220.jpg 390w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/04/Videoshot_20260414_202459.jpg 1920w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></div>
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<div dir="auto">
<div dir="auto">
<div dir="auto">वही विनीत कुमार सालूमन ने बताया की उनकी स्मृति में जांजगीर में फंक मेमोरियल स्कूल की स्थापना की गई, जो आज भी उनके योगदान की याद दिलाता है, हालांकि पुराना हॉस्टल भवन अब जर्जर हो चुका है, लेकिन वहां मौजूद शिलालेख आज भी उनके कार्यों की गवाही देता है, हर वर्ष 15 अप्रैल को उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है, इसके साथ ही स्कूल के पास बने स्वागत द्वार को मिस एनी क्लेमर फंक मेमोरियल गेट नाम से बनाया जा रहा है, मिस एनी क्लेमर फंक का जीवन सिर्फ एक शिक्षिका या मिशनरी की कहानी नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और त्याग का अद्वितीय उदाहरण है, जिसने जांजगीर को इतिहास के पन्नों में एक खास पहचान दिलाई है.</div>
</div>
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		<title>हनुमान जन्मोत्सव : नहरिया बाबा मंदिर में आस्था का महासंगम, 2 अप्रैल को उमड़ेगी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़, भव्य तैयारियां पूरी, मानस महायज्ञ, भजन-कीर्तन और भंडारे से गूंजेगा बाबा का दरबार, प्रशासन अलर्ट&#8230;</title>
		<link>https://jcn24.in/hanuman-janmotsav-a-great-confluence-of-faith-in-nahariya-baba-temple/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Lakheshwar Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 17:35:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Special Reports]]></category>
		<category><![CDATA[Astrology & Vastu]]></category>
		<category><![CDATA[Chhattisgarh]]></category>
		<category><![CDATA[Janjgir–Champa]]></category>
		<category><![CDATA[Raipur]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; हनुमान जन्मोत्सव : नहरिया बाबा मंदिर में आस्था का महासंगम, 2 अप्रैल को उमड़ेगी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़, भव्य तैयारियां पूरी, मानस महायज्ञ, भजन-कीर्तन और भंडारे से गूंजेगा बाबा का दरबार, प्रशासन अलर्ट&#8230; जांजगीर-चांपा: हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर जिले में आस्था का विशेष माहौल देखने को मिल रहा है, जिला मुख्यालय जांजगीर नैला &#8230;</p>
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<ul>
<li><strong>हनुमान जन्मोत्सव : नहरिया बाबा मंदिर में आस्था का महासंगम, 2 अप्रैल को उमड़ेगी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़,</strong></li>
<li><strong> भव्य तैयारियां पूरी, मानस महायज्ञ, भजन-कीर्तन और भंडारे से गूंजेगा बाबा का दरबार, प्रशासन अलर्ट&#8230;</strong></li>
</ul>
<p>जांजगीर-चांपा: हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर जिले में आस्था का विशेष माहौल देखने को मिल रहा है, जिला मुख्यालय जांजगीर नैला में स्थित प्रसिद्ध नहरिया बाबा हनुमान मंदिर में इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, मंदिर में हनुमान जयंती को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं.</p>
<p>नहर किनारे स्थित इस प्राचीन मंदिर में पूरे वर्ष श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन मंगलवार, शनिवार और विशेष पर्वों पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है, हनुमान जन्मोत्सव, जो इस वर्ष 2 अप्रैल को मनाया जाएगा, इस दिन करीब 50 हजार से अधिक भक्तों के दर्शन के लिए आने का अनुमान है, मंदिर परिसर में इस अवसर पर मानस महायज्ञ, संत सम्मेलन, भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन किया जाएगा, श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण और अन्य सुविधाओं की भी व्यापक व्यवस्था की जा रही है. साथ ही मंदिर परिसर रेलवे ट्रैक से लगा हुआ है जिसके कारण सुरक्षा की दृष्टि से रेलवे पुलिस और स्थानीय पुलिस यहां ड्यूटी देते है.</p>
<p>मंदिर के पंडित मन्नूलाल शुक्ला के अनुसार, हनुमान जयंती के दिन सुबह से लेकर देर रात तक भक्तों की भारी भीड़ रहती है, दिनभर पूजा-अर्चना, हनुमान चालीसा पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, इस अवसर पर जिले सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ ओडिशा, मध्यप्रदेश, झारखंड और महाराष्ट्र से भी श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं, मंदिर के इतिहास के बारे में बताया जाता है कि वर्ष 1984 में नहर निर्माण के दौरान यहां हनुमान जी की प्रतिमा प्राप्त हुई थी, इसके बाद पीपल के पेड़ के नीचे पूजा शुरू हुई और धीरे-धीरे यह स्थान श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बन गया, नहर के किनारे स्थित होने के कारण ही इसे “नहरिया बाबा” के नाम से जाना जाता है.</p>
<p>नहरियाबाबा हनुमान सेवा समिति के सचिव प्रमोद कुमार तिवारी ने बताया कि हनुमान जन्मोत्सव को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं, भक्तों की सुविधा के लिए आने-जाने, पेयजल और भंडारे की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना नहरिया बाबा अवश्य पूर्ण करते हैं, यही कारण है कि यह मंदिर पूरे प्रदेश में आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.</p>
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		<title>छत्तीसगढ़ के ‘उज्जैन’ पीथमपुर में रंग पंचमी पर भव्य शिव बारात, चांदी की पालकी में विराजेंगे बाबा कालेश्वर नाथ, नागा साधु बनेंगे बाराती और करेंगे शौर्य प्रदर्शन&#8230;</title>
		<link>https://jcn24.in/grand-shiva-procession-on-rang-panchami-in-ujjain-pithampur-of-chhattisgarh-baba-kaleshwar-nath-will-sit-in-a-silver-palanquin/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Lakheshwar Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Mar 2026 05:48:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[Astrology & Vastu]]></category>
		<category><![CDATA[Chhattisgarh]]></category>
		<category><![CDATA[Janjgir–Champa]]></category>
		<category><![CDATA[Lifestyle & Culture]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[Special Reports]]></category>
		<category><![CDATA[State & Local News]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; रंग पंचमी पर पीथमपुर में निकलेगी बाबा कालेश्वर नाथ की भव्य बारात, चांदी की विशाल पालकी में होगा नगर भ्रमण, नागा साधु बनेंगे बाराती&#8230; जांजगीर-चांपा जिले में रंग पंचमी के अवसर पर हर साल आस्था, परंपरा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलता है, जिला मुख्यालय जांजगीर से करीब 10 किलोमीटर दूर हसदेव &#8230;</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://jcn24.in/grand-shiva-procession-on-rang-panchami-in-ujjain-pithampur-of-chhattisgarh-baba-kaleshwar-nath-will-sit-in-a-silver-palanquin/">छत्तीसगढ़ के ‘उज्जैन’ पीथमपुर में रंग पंचमी पर भव्य शिव बारात, चांदी की पालकी में विराजेंगे बाबा कालेश्वर नाथ, नागा साधु बनेंगे बाराती और करेंगे शौर्य प्रदर्शन&#8230;</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://jcn24.in">JCN24</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<ul>
<li><strong>रंग पंचमी पर पीथमपुर में निकलेगी बाबा कालेश्वर नाथ की भव्य बारात, चांदी की विशाल पालकी में होगा नगर भ्रमण, नागा साधु बनेंगे बाराती&#8230;</strong></li>
</ul>
<p>जांजगीर-चांपा जिले में रंग पंचमी के अवसर पर हर साल आस्था, परंपरा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलता है, जिला मुख्यालय जांजगीर से करीब 10 किलोमीटर दूर हसदेव नदी के किनारे बसे पीथमपुर गांव में भगवान शिव बाबा कालेश्वर नाथ के रूप में विराजमान हैं, यहां रंग पंचमी के दिन बाबा कालेश्वर नाथ की भव्य बारात चांदी की विशाल पालकी में निकाली जाती है, जिसमें देशभर से पहुंचे नागा साधु और संत-महात्मा बाराती के रूप में शामिल होते हैं.</p>
<p>दरअसल, होली के पांचवें दिन यानी रंग पंचमी पर छत्तीसगढ़ के उज्जैन के नाम से प्रसिद्ध पीथमपुर गांव में यह परंपरा बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ निभाई जाती है, इस अवसर पर बाबा कालेश्वर नाथ की प्रतिमा को चांदी से बनी विशाल पालकी में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाता है, परंपरा के अनुसार देश के अलग-अलग अखाड़ों से पहुंचे नागा साधु इस बारात में शामिल होकर शौर्य और धार्मिक परंपराओं का प्रदर्शन करते हैं।</p>
<p style="padding-left: 40px;"><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-4924" src="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0043-216x300.jpg" alt="" width="216" height="300" srcset="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0043-216x300.jpg 216w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0043-737x1024.jpg 737w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0043-768x1067.jpg 768w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260308-WA0043.jpg 921w" sizes="auto, (max-width: 216px) 100vw, 216px" /></p>
<p>इस भव्य आयोजन को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से पीथमपुर पहुंचते हैं। बारात के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिलता है। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच निकाली जाने वाली इस शिव बारात का नजारा बेहद आकर्षक होता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार पीथमपुर स्थित बाबा कालेश्वर नाथ के दर्शन मात्र से निसंतान दंपत्तियों को संतान की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही यह भी विश्वास है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने पर पेट संबंधी पुराने से पुराने रोगों से भी मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि हर साल इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर बाबा के दर्शन करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।</p>
<p>राजपुरोहित कृष्णा प्रसाद द्विवेदी के अनुसार पीथमपुर में विराजमान बाबा कालेश्वर नाथ के प्रति लोगों की गहरी आस्था है, श्रद्धालु उन्हें क्लेश हरने वाला भगवान मानते हैं। यही वजह है कि रंग पंचमी के दिन निकलने वाली इस शिव बारात में शामिल होने के लिए प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से भक्त यहां पहुंचते हैं।</p>
<p>उन्होंने बताया कि पीथमपुर में शिव बारात निकालने की यह परंपरा करीब 200 वर्षों से चली आ रही है। इस अवसर पर चांदी से बनी विशाल पालकी में बाबा कालेश्वर नाथ को विराजमान कर मंदिर प्रांगण से भव्य बारात निकाली जाती है। यह बारात मंदिर परिसर से शुरू होकर पूरे नगर और मेला क्षेत्र में भ्रमण करती है। नगर भ्रमण के बाद बाबा कालेश्वर नाथ की प्रतिमा को हसदेव नदी के तट पर ले जाया जाता है, जहां विधि-विधान के साथ प्रतिमा का स्नान कराया जाता है और उसके बाद भव्य महाआरती की जाती है। महाआरती के बाद बाबा की प्रतिमा को पुनः मंदिर में स्थापित किया जाता है और इसी के साथ यह धार्मिक आयोजन संपन्न होता है।</p>
<p>इस वर्ष 2026 को रंग पंचमी का पर्व 8 मार्च को मनाया जा रहा है। इस अवसर पर दोपहर करीब 3 बजे बाबा कालेश्वर नाथ की भव्य बारात मंदिर परिसर से निकलेगी, जिसमें हजारों की संख्या में शिव भक्त शामिल होंगे। साथ ही देश के विभिन्न अखाड़ों से पहुंचे संत-महात्मा और नागा साधु भी इस बारात का हिस्सा बनेंगे।</p>
<p><strong>15 दिवसीय मेले की भी होगी शुरुआत</strong>&#8230;रंग पंचमी के दिन बाबा कालेश्वर नाथ की बारात के साथ ही पीथमपुर में 15 दिवसीय मेले की भी शुरुआत हो जाती है। महाआरती के बाद बाबा की प्रतिमा को वापस मंदिर में स्थापित किया जाता है और इसके साथ ही मेले का शुभारंभ होता है।</p>
<p>इस मेले में प्रदेशभर से श्रद्धालु और दर्शनार्थी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। मेले के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं। पीथमपुर में बाबा कालेश्वर नाथ की यह परंपरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जिसे ग्रामीण और श्रद्धालु मिलकर आज भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभा रहे हैं।</p>
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		<title>रंग पंचमी पर पंतोरा में अनोखी लट्ठमार होली: कुंवारी कन्याएं अभिमंत्रित बांस की छड़ियों से निभाती हैं सदियों पुरानी परंपरा, आस्था और मान्यता का अनोखा संगम, देखे Video&#8230;</title>
		<link>https://jcn24.in/on-rang-panchami-unique-lathmar-holi-in-pantora/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Lakheshwar Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Mar 2026 05:29:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Astrology & Vastu]]></category>
		<category><![CDATA[Chhattisgarh]]></category>
		<category><![CDATA[Janjgir–Champa]]></category>
		<category><![CDATA[Lifestyle & Culture]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
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		<category><![CDATA[Special Reports]]></category>
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					<description><![CDATA[<p> रंग पंचमी पर पंतोरा में अनोखी लट्ठमार होली, कुंवारी कन्याएं अभिमंत्रित बांस की छड़ियों से निभाती हैं सदियों पुरानी परंपरा, गांव में आस्था का प्रतीक, जानिए मान्यता&#8230;. छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में रंग पंचमी के अवसर पर एक अनोखी और आस्था से जुड़ी परंपरा देखने को मिलती है, जिले के पंतोरा गांव में होली के &#8230;</p>
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<li> <strong>रंग पंचमी पर पंतोरा में अनोखी लट्ठमार होली, कुंवारी कन्याएं अभिमंत्रित बांस की छड़ियों से निभाती हैं सदियों पुरानी परंपरा, गांव में आस्था का प्रतीक, जानिए मान्यता&#8230;.</strong></li>
</ul>
<p>छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में रंग पंचमी के अवसर पर एक अनोखी और आस्था से जुड़ी परंपरा देखने को मिलती है, जिले के पंतोरा गांव में होली के पांचवें दिन यानी रंग पंचमी पर हर साल विशेष तरीके से लट्ठमार होली खेली जाती है, इस परंपरा की सबसे खास बात यह है कि यहां गांव की कुंवारी कन्याएं अभिमंत्रित बांस की छड़ियों से लोगों को स्पर्श करती हैं. यह आयोजन मां भवानी मंदिर परिसर में होता है, जहां ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्रित होकर इस अनोखी परंपरा का हिस्सा बनते हैं, ग्रामीणों की मान्यता है कि कुंवारी कन्याओं द्वारा अभिमंत्रित बांस की छड़ी का स्पर्श मिलने से बीमारियां दूर होती हैं और गांव में सुख-समृद्धि बनी रहती है.</p>
<p>गौरतलब है कि पूरे देशभर में 4 मार्च को होली का त्योहार धूमधाम से मनाया गया, जबकि 8 मार्च को रंग पंचमी मनाई जाएगी, वहीं जांजगीर-चांपा जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर कोरबा रोड पर स्थित पंतोरा गांव में होली का त्योहार रंग और गुलाल के साथ मनाया जाता है, लेकिन यहां की असली पहचान होली के पांचवें दिन खेली जाने वाली लट्ठमार होली है, राधा के गांव बरसाना की तर्ज पर पंतोरा में भी यह परंपरा आदिकाल से चली आ रही है, स्थानीय भाषा में इसे डंगाही होली कहा जाता है. इस दिन गांव की कुंवारी कन्याएं मंदिर में अभिमंत्रित बांस की छड़ियों से लोगों को स्पर्श करती हैं, ग्रामीणों की आस्था है कि इस छड़ी का आशीर्वाद मिलने से बीमारियां दूर होती हैं और जीवन में खुशहाली आती है, यही कारण है कि इस पर्व का पंतोरा गांव में विशेष महत्व है और लोग इस परंपरा का सम्मान करते हुए पूरे उत्साह के साथ इसमें शामिल होते हैं.</p>
<p>लट्ठमार होली की इस परंपरा के बारे में स्थानीय निवासी राजेश तिवारी बताते हैं कि बलौदा ब्लॉक के पंतोरा गांव में स्थित मां भवानी मंदिर परिसर में हर साल रंग पंचमी के दिन बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित होते हैं, यहां लट्ठमार होली की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है. उन्होंने बताया कि इस परंपरा की शुरुआत रंग पंचमी के एक दिन पहले से ही हो जाती है, रंग पंचमी की पूर्व संध्या पर ग्रामीण कोरबा जिले के मड़वारानी के जंगल से विशेष बांस की छड़ी लेकर आते हैं, इस छड़ी को चुनने की भी एक खास परंपरा है- जिस बांस की छड़ी को एक ही कुल्हाड़ी के वार में काटा जाता है, उसी छड़ी को इस पर्व के लिए चुना जाता है, उसके बाद उस बांस की छड़ी की विधि-विधान से पूजा की जाती है.</p>
<p>रंग पंचमी के दिन मां भवानी मंदिर में उस छड़ी की पूजा-अर्चना की जाती है और यह कामना की जाती है कि गांव में किसी प्रकार की बीमारी न फैले और सभी ग्रामीण सुखी व स्वस्थ रहें, मंदिर में माता की पूजा के बाद कुंवारी कन्याओं द्वारा उस अभिमंत्रित बांस की छड़ी को पांच बार मां भवानी को स्पर्श कराया जाता है, इसके बाद मंदिर परिसर में विराजमान अन्य देवी-देवताओं को भी उसी छड़ी से स्पर्श कराया जाता है। इसके बाद यह छड़ी कुंवारी कन्याओं को दी जाती है.</p>
<p>मंदिर की पूजा के पश्चात गांव के बैगा (पंडित) द्वारा वह छड़ी कुंवारी कन्याओं को सौंप दी जाती है, इसके बाद कन्याएं मंदिर परिसर के बाहर खड़े ग्रामीणों, बच्चों और बुजुर्गों को उस छड़ी से मारते ( सांकेतिक स्पर्श) है, यहां की सबसे खास बात यह है कि इस छड़ी का स्पर्श पाने के लिए लोग खुद आगे आते हैं, यहां तक कि रास्ते से गुजरने वाले राहगीर भी इस परंपरा में शामिल होने के लिए रुक जाते हैं और छड़ी का स्पर्श ग्रहण करते हैं, इसे कोई भी बुरा नहीं मानता, बल्कि इसे आशीर्वाद के रूप में स्वीकार किया जाता है.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस दौरान मंदिर परिसर में रंग-गुलाल के साथ उत्सव का माहौल बन जाता है, ग्रामीण एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और पूरे गांव में खुशियों का माहौल दिखाई देता है, ग्रामीणों का मानना है कि जब से यह परंपरा शुरू हुई है, तब से गांव में किसी प्रकार की गंभीर बीमारी नहीं फैली है, इसलिए यह परंपरा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि गांव की आस्था और विश्वास का प्रतीक बन चुकी है.पंतोरा गांव के लोग इस परंपरा को अपनी सांस्कृतिक पहचान मानते हैं और पीढ़ी दर पीढ़ी इसे संजोकर आगे बढ़ा रहे हैं, ग्रामीणों का कहना है कि आने वाली पीढ़ियां भी इसी तरह इस अनोखी परंपरा को निभाती रहेंगी और मां भवानी की कृपा पूरे गांव पर बनी रहेगी.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वीडियो देखने के लिए लिंक टच करें .. https://www.instagram.com/reel/DVl6KfhiLCF/?igsh=cXl6azc0aW9zOTBj</p>
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		<title>मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व: घर पर कैसे करें ऐसा स्नान जिससे सात तीर्थ और गंगा स्नान के समान पुण्य मिले, जानिए तिल-गुड़, खिचड़ी खाने की परंपरा और दान-पुण्य का पावन रहस्य…</title>
		<link>https://jcn24.in/religious-importance-of-makar-sankranti-how-to-take-such-a-bath-at-home-which-gives-the-same-virtues-as-bathing-in-seven-pilgrimages-and-ganga-know-how-to-eat-sesame-and-jaggery-khichdi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Lakheshwar Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 13 Jan 2026 16:12:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Astrology & Vastu]]></category>
		<category><![CDATA[Bilaspur]]></category>
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		<category><![CDATA[Janjgir–Champa]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>जांजगीर-चांपा :- मकर संक्रांति का पावन पर्व 14 जनवरी को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं, जिसे देवताओं का दिन कहा गया है। इसी दिन से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं तथा खरमास समाप्त होने के साथ शुभ व मांगलिक कार्यों की &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>जांजगीर-चांपा :- मकर संक्रांति का पावन पर्व 14 जनवरी को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं, जिसे देवताओं का दिन कहा गया है। इसी दिन से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं तथा खरमास समाप्त होने के साथ शुभ व मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है।</p>
<p>जांजगीर दुर्गा मंदिर के पंडित बसंत शर्मा महाराज ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन नदी या तीर्थ में स्नान कर सूर्य देव की पूजा और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। यदि कोई तीर्थ स्थल नहीं जा सकता, तो घर में स्नान करके भी गंगा स्नान के समान पुण्य प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए स्नान के पानी में थोड़ा तिल और गंगाजल मिलाकर, उस जल को स्पर्श करते हुए सात बार “गंगा-गंगा” (सप्त मोक्षदायिनी) का स्मरण कर स्नान करने से गंगा स्नान के बराबर पुण्य मिलता है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-4350" src="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/87ecf5a754c769c6d4b3f4e86f005aabe72a567889a58c8cf3fc759a94325e55.0-300x168.jpeg" alt="" width="300" height="168" srcset="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/87ecf5a754c769c6d4b3f4e86f005aabe72a567889a58c8cf3fc759a94325e55.0-300x168.jpeg 300w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/87ecf5a754c769c6d4b3f4e86f005aabe72a567889a58c8cf3fc759a94325e55.0-390x220.jpeg 390w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/87ecf5a754c769c6d4b3f4e86f005aabe72a567889a58c8cf3fc759a94325e55.0.jpeg 739w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>पंडित जी ने बताया कि तिल, गुड़ और खिचड़ी खाने से स्वास्थ्य और पुण्य दोनों की प्राप्ति होती है। इस दिन तिल-गुड़ के लड्डू, चावल-दाल-सेमी, वस्त्र और अन्न का दान किया जाता है। तिल के लड्डू में सिक्का या आभूषण रखकर दान करने तथा तिल के पहाड़ के आकार का दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है।</p>
<p>उन्होंने सप्त मोक्षदायिनी का मतलब बताया की &#8220;अयोध्या मथुरा मायाकाशी कांचीत्वन्तिका, पुरी द्वारावतीचैव सप्तैते मोक्षदायिका&#8221; इसका अर्थ बताते हुए कहा-  “अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांचीपुरम, उज्जैन और द्वारिका” इन सात तीर्थों के समान पुण्य मकर संक्रांति के विधिपूर्वक स्नान से प्राप्त होता है, इसी कारण इस दिन दान, स्नान और पुण्य कर्म का विशेष महत्व बताया गया है।</p>
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		<title>युवा दिवस विशेष: “बदलते बस्तर” की तस्वीर, पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय की कलम से&#8230;.</title>
		<link>https://jcn24.in/youth-day-special-photo-of-changing-bastar-from-the-pen-of-superintendent-of-police-vijay-kumar-pandey/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Lakheshwar Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 11 Jan 2026 17:42:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Special Reports]]></category>
		<category><![CDATA[Chhattisgarh]]></category>
		<category><![CDATA[Janjgir–Champa]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>राष्ट्रीय युवा दिवस (12 जनवरी) के अवसर पर जांजगीर-चांपा जिले के पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय, IPS ने “बदलते बस्तर” शीर्षक से अपनी लिखी कविता साझा कर एक संवेदनशील और प्रेरणादायक संदेश दिया है, यह कविता बस्तर की उस यात्रा को बयान करती है, जो हिंसा, भय और खामोशी से निकलकर शांति, भरोसे और उम्मीद &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>राष्ट्रीय युवा दिवस (12 जनवरी) के अवसर पर जांजगीर-चांपा जिले के पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय, IPS ने “बदलते बस्तर” शीर्षक से अपनी लिखी कविता साझा कर एक संवेदनशील और प्रेरणादायक संदेश दिया है, यह कविता बस्तर की उस यात्रा को बयान करती है, जो हिंसा, भय और खामोशी से निकलकर शांति, भरोसे और उम्मीद की ओर बढ़ रही है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>12 जनवरी को जब पूरा देश राष्ट्रीय युवा दिवस मना रहा है, तब एसपी विजय कुमार पाण्डेय ने अपने अनुभवों और भावनाओं को शब्दों में ढालते हुए कविता के माध्यम से युवाओं और समाज से संवाद किया, उनकी स्वयं लिखी कविता “बदलते बस्तर” सोशल मीडिया पर सामने आते ही तेजी से लोगों के दिलों तक पहुंच गई।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस कविता की खासियत यह है कि यह कल्पना नहीं, बल्कि बस्तर की उस सच्चाई की आवाज़ है, जिसे एक पुलिस अधिकारी ने बेहद करीब से देखा और महसूस किया है। कविता की शुरुआती पंक्तियां बस्तर के उस दौर की तस्वीर खींचती हैं, जब डर रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था—काटे गए गले, बिखरी लाशें, बारूद की गंध, टूटे पुल और खून से सनी सड़कें। यह दर्द किताबों में दर्ज नहीं था, बल्कि ज़मीन पर लिखा गया था।</p>
<p>लेकिन यहीं से कविता एक नई दिशा लेती है और उम्मीद की किरण दिखाई देती है। वही बस्तर अब बदलता नजर आता है—जहां स्कूलों से बच्चों की आवाजें गूंजती हैं, महुए की खुशबू हवा में फैलती है, झरनों की कलकल सुनाई देती है, गांव रोशन हो रहे हैं और चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। डर की जगह भरोसे ने ले ली है और सन्नाटे की जगह भविष्य की आहट सुनाई देने लगी है।</p>
<p>एसपी विजय कुमार पाण्डेय की यह कविता न सिर्फ बदलते बस्तर की कहानी कहती है, बल्कि युवाओं को यह संदेश भी देती है कि साहस, संवेदना और विश्वास से किसी भी अंधेरे को रोशनी में बदला जा सकता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<blockquote><p>कटे हुए गले</p>
<p>चिथड़े हुए शरीर</p>
<p>बिखरी हुई लाशें</p>
<p>अब नहीं होंगी&#8230;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>गोलियों से छलनी सीना</p>
<p>बारूद से उड़े पैर</p>
<p>स्पाइक से बिंधे तलुए</p>
<p>अब नहीं होंगे&#8230;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>खून से सनी सड़के</p>
<p>वायर बिछी हुई राहें</p>
<p>टूटे हुए पुल</p>
<p>अब नहीं होंगे&#8230;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>हवा मे बारूद की गंध</p>
<p>पेड़ों पर धोखे का सामन</p>
<p>पानी मे जहर</p>
<p>अब नहीं होंगे&#8230;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बूढ़ी मां के सूखे आंसू</p>
<p>पत्नी का चित्कार</p>
<p>बाप का गुमसुम चेहरा</p>
<p>अब नहीं होंगे&#8230;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बच्चों के फुले हुए पेट</p>
<p>कांवर मे आते हुए बीमार</p>
<p>इलाज की लाचारी</p>
<p>अब नहीं होंगे&#8230;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>100 जगह कटी हुई सड़क</p>
<p>टूटे हुए स्कूल</p>
<p>ध्वस्त बिजली के खम्भे</p>
<p>अब नहीं होंगे&#8230;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>साल के पत्तों की सरसराहट</p>
<p>हवा मे महुए की खुश्बू</p>
<p>झरने के गिरने का दृश्य</p>
<p>अब होंगे&#8230;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>स्कूलो से आती पहाड़े की आवाज़े</p>
<p>राहों मे चलते पहिये</p>
<p>रोशन होते गांव</p>
<p>अब होंगे&#8230;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>निर्भय घूमते लोग</p>
<p>पुस्तक पकड़े बच्चे</p>
<p>मुस्कराती माताएं</p>
<p>अब होंगे&#8230;</p>
<p><strong>श्री विजय कुमार पाण्डेय IPS ( पुलिस अधीक्षक जांजगीर–चांपा )</strong></p></blockquote>
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			</item>
		<item>
		<title>रायगढ़ ब्रेकिंग: महिला आरक्षक से बर्बरता का मुख्य आरोपी गिरफ्तार, फटी बनियान-अंडरवियर और जूतों की माला पहनाकर पुलिस ने शहर में निकाला जुलूस, नारी सम्मान से खिलवाड़ पर कानून का करारा जवाब, देखें वीडियो…</title>
		<link>https://jcn24.in/raigarh-breaking-main-accused-of-brutality-with-female-constable-arrested-police-took-her-out-in-the-city-after-garlanding-her-with-torn-vest/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Lakheshwar Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 05 Jan 2026 15:25:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[Chhattisgarh]]></category>
		<category><![CDATA[Janjgir–Champa]]></category>
		<category><![CDATA[Raipur]]></category>
		<category><![CDATA[Special Reports]]></category>
		<category><![CDATA[State & Local News]]></category>
		<category><![CDATA[Video News]]></category>
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					<description><![CDATA[<p> महिला आरक्षक से बर्बरता का मुख्य आरोपी गिरफ्तार, फटी बनियान-अंडरवियर और जूतों की माला पहनाकर पुलिस ने शहर में निकाला जुलूस, नारी सम्मान से खिलवाड़ पर कानून का करारा जवाब, देखें वीडियो&#8230; छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में 27 दिसंबर को हुई हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की गंभीर घटना में महिला पुलिसकर्मी के &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li> <strong>महिला आरक्षक से बर्बरता का मुख्य आरोपी गिरफ्तार, फटी बनियान-अंडरवियर और जूतों की माला पहनाकर पुलिस ने शहर में निकाला जुलूस, नारी सम्मान से खिलवाड़ पर कानून का करारा जवाब, देखें वीडियो&#8230;</strong></li>
</ul>
<p>छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में 27 दिसंबर को हुई हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की गंभीर घटना में महिला पुलिसकर्मी के साथ की गई अमानवीय बदसलूकी के मामले में रायगढ़ पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है, इस मामले के मुख्य आरोपी चित्रसेन साहू की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने न सिर्फ कानूनी बल्कि सख्त और कार्रवाई करते हुए समाज को स्पष्ट संदेश दिया है, महिला पुलिसकर्मियों के आक्रोश को देखते हुए आरोपी को शहर में पैदल जुलूस निकालकर जनता के सामने पेश किया गया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>रायगढ़ के हेमू कालानी चौक से शुरू हुए इस जुलूस के दौरान आरोपी के चेहरे पर कालिख और लिपस्टिक पोती गई, उसे फटी बनियान, चड्डी पहनाकर जूतों की माला पहनाई गई, बड़ी संख्या में मौजूद आमजन इस कार्रवाई के गवाह बने, इसके बाद आरोपी को जमुनाहिंद चौक से न्यायालय तक लाया गया, यह कार्रवाई सिर्फ एक आरोपी को सजा देने तक सीमित नहीं थी, बल्कि समाज के लिए एक कड़ा संदेश था, कि महिला सम्मान के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>
<div style="width: 848px;" class="wp-video"><video class="wp-video-shortcode" id="video-4238-1" width="848" height="478" preload="metadata" controls="controls"><source type="video/mp4" src="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/VID-20260105-WA0085.mp4?_=1" /><a href="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/VID-20260105-WA0085.mp4">https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/VID-20260105-WA0085.mp4</a></video></div>
<p>गौरतलब है कि 27 दिसंबर की दोपहर तमनार क्षेत्र के CHP चौक में आंदोलन के दौरान हालात बेकाबू हो गए थे। आक्रोशित उपद्रवियों ने जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की, इसी दौरान महिला थाना प्रभारी सहित अन्य महिला पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट, बदसलूकी और वर्दी फाड़ने जैसी शर्मनाक घटनाओं को अंजाम दिया गया, इस घटना ने न सिर्फ पुलिस महकमे बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया था, घटना के बाद रायगढ़ पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया। लगातार छापेमारी के बाद अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मुख्य आरोपी चित्रसेन साहू की गिरफ्तारी के साथ पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है, महिला पुलिसकर्मियों ने इस कार्रवाई के जरिए अपना आक्रोश और आत्मसम्मान का संदेश भी सामने रखा।</p>
<div style="width: 478px;" class="wp-video"><video class="wp-video-shortcode" id="video-4238-2" width="478" height="850" preload="metadata" controls="controls"><source type="video/mp4" src="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/VID-20260105-WA0074.mp4?_=2" /><a href="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/VID-20260105-WA0074.mp4">https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/VID-20260105-WA0074.mp4</a></video></div>
<p>पुलिस अधिकारियों ने दो टूक कहा है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ हिंसा और महिला सम्मान पर हमला किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे महिला वर्दी में हो या सामान्य जीवन में, महिला का सम्मान सर्वोपरि है, कानून व्यवस्था को चुनौती देने वालों और हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई जारी रहेगी, फिलहाल इस मामले में एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है और जांच लगातार आगे बढ़ रही है, यह पूरी कार्रवाई समाज को यह स्पष्ट संदेश देने के लिए है कि नारी गरिमा से खिलवाड़ करने वाले अपराधी चाहे कितने भी ताकतवर क्यों न हों, वे कानून के शिकंजे से नहीं बच सकते.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>नववर्ष की शुरुआत नहरिया बाबा के दरबार से, जांजगीर-नैला में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, भजन-कीर्तन से गूंजा मंदिर परिसर&#8230;</title>
		<link>https://jcn24.in/beginning-of-the-new-year-a-crowd-of-devotees-gathered-in-janjgir-naila-from-the-court-of-nahariya-baba/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Lakheshwar Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Jan 2026 16:42:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Special Reports]]></category>
		<category><![CDATA[Chhattisgarh]]></category>
		<category><![CDATA[Janjgir–Champa]]></category>
		<category><![CDATA[State & Local News]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>साल के पहले दिन नहरिया बाबा में रहती है हजारों की संख्या में श्रद्धालुओ की भीड़, नएवर्ष पर श्रद्धालु लेते हैं बाबा का आशीर्वाद&#8230; जांजगीर नैला में स्थित नहरिया बाबा का मंदिर श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है. यहां नव वर्ष के दिन प्रतिवर्ष धूमधाम से मनाया जाता है. जांजगीर शहरवासी नए साल के अवसर &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>साल के पहले दिन नहरिया बाबा में रहती है हजारों की संख्या में श्रद्धालुओ की भीड़, नएवर्ष पर श्रद्धालु लेते हैं बाबा का आशीर्वाद&#8230;</strong></li>
</ul>
<p>जांजगीर नैला में स्थित नहरिया बाबा का मंदिर श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है. यहां नव वर्ष के दिन प्रतिवर्ष धूमधाम से मनाया जाता है. जांजगीर शहरवासी नए साल के अवसर पर नववर्ष की शुरूवात नहरिया बाबा (हनुमान मंदिर) के दर्शन करके अपने और अपने परिवार के खुशहाली की मनोकामना कर पूजा करते है. नहरिया बाबा मंदिर के प्रति लोगों की आस्था लगातार बढ़ रही है. नए साल के अवसर पर यहां हजारों की संख्या में जांजगीर में साथ ही दूसरे जिले से भी लोग दर्शन करने आते है. यहां प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को यहां हनुमान चालीसा का पाठ होता है, साथ ही प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं, जानिए श्रद्धालुओं ने क्या कहा&#8230;.</p>
<p><em><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-4166" src="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/InShot_20260101_135956201-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/InShot_20260101_135956201-300x225.jpg 300w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/InShot_20260101_135956201-1024x768.jpg 1024w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/InShot_20260101_135956201-768x576.jpg 768w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/InShot_20260101_135956201-1536x1152.jpg 1536w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/InShot_20260101_135956201-2048x1536.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></em></p>
<p><strong>कैसे पड़ा नहरिया बाबा नाम.</strong>.जांजगीर नैला में नहर किनारे हनुमान जी की प्रतिमा की स्थापना होने के कारण इनका नाम नहरिया बाबा पड़ा है. यहां नहरिया बाबा के रूप में हनुमान जी की पूजा अर्चना होती है. जांजगीर के प्रसिद्ध नहरिया बाबा मंदिर में नववर्ष को लेकर प्रतिवर्ष आस्था का जनसैलाब उमड़ता है, हजारों की संख्या में भक्त यहां मंदिर पहुंचकर नहरिया बाबा के दरबार में मत्था टेकते है. वही मंदिर समिति द्वारा यहां भंडारे का आयोजन किया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त प्रसाद ग्रहण किया करते है, दिनभर मंदिर में भजन-कीर्तन का दौर चलता रहता है.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यह नहरिया बाबा मंदिर रेल्वे ट्रैक और नहर किनारे है. वही नववर्ष के दिन दिनभर भीड़ अधिक होने के कारण कुछ अनहोनी न हो जाए इसलिए भीड़ को देखते हुए रेल्वे ट्रैक के दोनो तरफ पुलिस के जवानों के अलावा सिक्योरिटी जवान पूरे समय व्यवस्था बनाने में लगे रहते है. इसी तरह शहर के अन्य मंदिरों में भी हनुमान जी की पूजा-अर्चना के लिए भीड़ लगी रही.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-4167" src="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/Videoshot_20260101_135727-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" srcset="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/Videoshot_20260101_135727-300x169.jpg 300w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/Videoshot_20260101_135727-1024x576.jpg 1024w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/Videoshot_20260101_135727-768x432.jpg 768w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/Videoshot_20260101_135727-1536x864.jpg 1536w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/Videoshot_20260101_135727-390x220.jpg 390w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2026/01/Videoshot_20260101_135727.jpg 1920w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>वही नहरिया बाबा समिति के सदस्य प्रमोद तिवारी और राहुल सिंह ने कहा की नए साल का आगाज श्रद्धालु देव दर्शन के साथ करते है वही आज 1 जनवरी को जांजगीर के नहरिया बाबा हनुमान मंदिर में आस्था के साथ भगवान नहरिया बाबा (हनुमान जी) के दर्शन के लिए भक्त घण्टों तक लाइन में लगे हुए है, मंदिर में मत्था टेकते हुए श्रद्धालु मन्नतें मांग रहे है, साल बेहतर गुजरे इसी कामना के साथ लोग परिवार समेत मंदिर पंहुच कर दर्शन कर रहे है. मंदिर में भी नव वर्ष को लेकर काफी तैयारी की गई थी, पूरे मंदिर परिसर को गुब्बारों और फूलों से सजाया गया था, दिनभर भजन कीर्तन चल रहा है.</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://jcn24.in/beginning-of-the-new-year-a-crowd-of-devotees-gathered-in-janjgir-naila-from-the-court-of-nahariya-baba/">नववर्ष की शुरुआत नहरिया बाबा के दरबार से, जांजगीर-नैला में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, भजन-कीर्तन से गूंजा मंदिर परिसर&#8230;</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://jcn24.in">JCN24</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>नए साल पर आस्था का महासंगम : जांजगीर-चांपा के ये 6 चमत्कारी और प्रसिद्ध मंदिर, जहां दर्शन से मिलती है सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति&#8230;</title>
		<link>https://jcn24.in/a-great-confluence-of-faith-on-new-year-these-6-miraculous-and-famous-temples-of-janjgir-champa/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Lakheshwar Yadav]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 31 Dec 2025 03:58:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Astrology & Vastu]]></category>
		<category><![CDATA[Chhattisgarh]]></category>
		<category><![CDATA[Janjgir–Champa]]></category>
		<category><![CDATA[Special Reports]]></category>
		<category><![CDATA[State & Local News]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अगर आप भी अपने नए वर्ष की शुरुआत मंदिर जाकर भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना के साथ करना चाहते हैं, तो छत्तीसगढ़ के जांजगीर- चांपा जिले के ये प्रसिद्ध मंदिर विशेष आस्था केंद्र हैं, इन मंदिरों की अपनी अलग-अलग धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं हैं, जहां हजारों की संख्या में भक्त मंदिरों के दर्शन कर नए &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>अगर आप भी अपने नए वर्ष की शुरुआत मंदिर जाकर भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना के साथ करना चाहते हैं, तो छत्तीसगढ़ के जांजगीर- चांपा जिले के ये प्रसिद्ध मंदिर विशेष आस्था केंद्र हैं, इन मंदिरों की अपनी अलग-अलग धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं हैं, जहां हजारों की संख्या में भक्त मंदिरों के दर्शन कर नए साल के लिए सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.</strong></li>
</ul>
<ol>
<li><strong>नहरिया बाबा</strong>: जांजगीर-नैला में स्थित नहरिया बाबा (हनुमान मंदिर) श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां विशेष रूप से नववर्ष के दिन हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं, नहर किनारे हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित होने के कारण इसे नहरिया बाबा कहा जाता है, नए साल की शुरुआत में जांजगीर सहित आसपास के जिलों से श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं, प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ होता है, साथ ही नववर्ष पर भंडारे और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है, मंदिर रेल्वे ट्रैक और नहर के पास स्थित होने से भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाते हैं। नहरिया बाबा मंदिर जांजगीर-नैला रेलवे स्टेशन से लगभग 300 मीटर दूर स्थित है.<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-4140" src="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00181-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00181-300x225.jpg 300w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00181-1024x768.jpg 1024w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00181-768x576.jpg 768w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00181-1536x1152.jpg 1536w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00181.jpg 1600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></li>
<li><strong>धार्मिक नगरी शिवरीनारायण</strong>: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की धार्मिक नगरी शिवरीनारायण को गुप्त प्रयाग कहा जाता है, यहां महानदी, शिवनाथ और जोक नदी का त्रिवेणी संगम है, यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य, आस्था, ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं से समृद्ध है तथा इसे भगवान जगन्नाथ का मूल स्थान और छत्तीसगढ़ का जगन्नाथपुरी भी माना जाता है, मान्यता है कि श्रीराम ने वनवास काल में यहां निवास किया और यहीं शबरी से भेंट कर उनके झूठे बेर खाए थे, यह स्थान भक्त और भगवान के अटूट संबंध का सजीव प्रमाण है, जहां आज भी दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान नारायण के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. यहां पहुंचने के लिए बिलासपुर से 65 किलोमीटर कार,बस से आ सकते है.<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-4145" src="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00162-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" srcset="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00162-300x200.jpg 300w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00162-1024x683.jpg 1024w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00162-768x512.jpg 768w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00162-1536x1024.jpg 1536w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00162.jpg 1599w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></li>
<li><strong>मां चंद्रहासिनी देवी: छत्तीसगढ़</strong> के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक मां चंद्रहासिनी देवी मंदिर सक्ती जिले के चंद्रपुर में एक छोटी पहाड़ी पर स्थित है, जहां माता 52 शक्तिपीठों में से एक के रूप में विराजमान हैं, चंद्रमा के आकार के कारण मां को चंद्रहासिनी या चंद्रसेनी कहा जाता है और मान्यता है कि यहां दर्शन से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा निःसंतान महिलाओं को संतान सुख प्राप्त होता है, महानदी और मांड नदी के बीच बसे चंद्रपुर की प्राकृतिक सुंदरता मंदिर की भव्यता को और बढ़ाती है, मंदिर परिसर में विशाल शिव-पार्वती प्रतिमा सहित अनेक पौराणिक झांकियां बनी हैं, वहीं चैत्र और क्वार नवरात्रि में 108 दीपों की महाआरती विशेष आकर्षण रहती है, नवरात्रि के साथ ही नए वर्ष में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-4144" src="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251231-WA0004-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251231-WA0004-300x225.jpg 300w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251231-WA0004-1024x768.jpg 1024w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251231-WA0004-768x576.jpg 768w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251231-WA0004.jpg 1280w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></li>
<li><strong>श्री श्याम प्रेम मंदिर</strong>: जांजगीर के प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल श्री श्याम प्रेम मंदिर नववर्ष की शुरुआत के लिए श्रद्धालुओं का प्रमुख आस्था केंद्र है, राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर की तर्ज पर निर्मित यह मंदिर जांजगीर जिला मुख्यालय में खोखसा रेलवे ओवरब्रिज के पास स्थित है और वृंदावन के प्रेम मंदिर से प्रेरित है, 14 फरवरी 2022 को प्रेम दिवस के अवसर पर यहां प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी, मंदिर में श्री खाटू श्याम बाबा के साथ तिरुपति बालाजी, सालासर बालाजी, जीण माता, शिव-पार्वती, श्रीराम दरबार, राधा-कृष्ण और दुर्गा माता की प्रतिमाएं स्थापित हैं, यहां नियमित रूप से श्याम संकीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं, सुंदर नक्काशी और शांत वातावरण इस मंदिर को विशेष बनाते हैं. मंदिर जांजगीर नैला रेलवे स्टेशन से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां ऑटो और बस की सुविधा उपलब्ध है.<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-4143" src="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00191-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00191-300x225.jpg 300w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00191-1024x768.jpg 1024w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00191-768x576.jpg 768w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00191-1536x1152.jpg 1536w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00191.jpg 1600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></li>
<li><strong>लक्ष्मणेश्वर मंदिर: खरौद </strong>नगर में है ऐतिहासिक लक्ष्मणेश्वर मंदिर अपने आप में बेहद अद्भुत और आश्चर्यों से भरा है. इस शिवलिंग में सवालाख छिद्र है जिसमे से एक पातालगामी है जबकि एक छिद्र अक्षय कुण्ड है उसमे जल हमेशा भरा रहता है वही सवालाख छिद्र होने के कारण लखनेश्वर महादेव भी कहा जाता है.इस महादेव में सवालाख छिद्र होने के कारण सवालाख चावल चढ़ाने का विशेष महत्व है. लोग मनोकामना पूरा करने के लिए चावल के सवालाख दाने कपड़े की थैली में भरकर चढ़ाते हैं. इस चावल को लाख चाउर या लक्ष चावल भी कहा जाता है. इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं लक्ष्मण ने की थी. इसलिए लक्ष्मणेश्वर महादेव भी कहते हैं. वही खरौद के इस मंदिर को छत्तीसगढ़ का काशी भी कहा जाता है.<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-4142" src="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00171-300x274.jpg" alt="" width="300" height="274" srcset="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00171-300x274.jpg 300w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00171-1024x936.jpg 1024w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00171-768x702.jpg 768w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251217-WA00171.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></li>
<li><strong>बाबा कलेश्वरनाथ</strong>: जांजगीर-चांपा जिले के जिला मुख्यालय जांजगीर से लगभग 10 किमी दूर हसदेव नदी के पावन तट पर स्थित ग्राम पीथमपुर में भगवान कलेश्वरनाथ का प्राचीन और श्रद्धा से परिपूर्ण मंदिर है, जहां जिले ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, मान्यता है कि सच्चे मन से भगवान कलेश्वरनाथ की आराधना करने से नि:संतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है, यहां महाशिवरात्रि पर यहां भव्य मेला लगता है, वही नए साल के अवसर पर आध्यात्मिक शांति, आस्था और प्रकृति के सान्निध्य का अनुभव लेने के लिए बाबा कलेश्वरनाथ धाम का दर्शन कर सकते है।<img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-4141" src="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/1767151665335-300x300.jpg" alt="" width="300" height="300" srcset="https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/1767151665335-300x300.jpg 300w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/1767151665335-1024x1024.jpg 1024w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/1767151665335-150x150.jpg 150w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/1767151665335-768x768.jpg 768w, https://jcn24.in/wp-content/uploads/2025/12/1767151665335.jpg 1080w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></li>
</ol>
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