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नवरात्रि स्पेशल: अड़भाड़ का ग्रेनाइट से बनी प्राचीन दक्षिणमुखी चमत्कारी अष्टभुजी माता का मंदिर, जहां खुदाई पर निकलते हैं देवी-देवताओं के खंडित मूर्तियां….

 

  • 5वी शताब्दी के यह मंदिर में ग्रेनाइट से बना आठ भुजाओं वाली अष्टभुजी माता विराजमान है, 
  • गांव में आज भी खुदाई पर मिलते है खण्डित अवस्था मूर्तियां…
  • छत्तीसगढ़ का अनोखा धरोहर स्थल – अड़भाड़ गांव, जहां मिलता है 5वीं-6वीं शताब्दी का इतिहास
  • भारत में अद्वितीय: कोलकाता और छत्तीसगढ़ में ही विराजमान हैं दक्षिणमुखी देवी की प्रतिमाएं

नवरात्रि की महापर्व का शुभारंभ हो चुका वही इस नवरात्रि में आपको छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध मातारानी में के बारे में बता रहे है, छत्तीसगढ़ में सर्व सिद्ध शक्तिपीठ मां दक्षिणी काली अष्टभुजी मंदिर प्रसिद्ध है जो भक्तों की आस्था जुडी हुई है. छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले से अलग होकर बने नवीन जिले सक्ती अंतर्गत अड़भाड़ गांव में ग्रेनाइट से बना आठ भुजाओं वाली अष्टभुजी माता का मंदिर है, यह बहुत ही प्राचीन धार्मिक स्थल है इस मंदिर को पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किया गया है. साथ ही यह गांव में खुदाई पर पांचवी-छठवीं शताब्दी के अवशेष मिलते हैं.

अड़भाड़ गांव का नाम पड़ा अष्टद्वार से...मंदिर के पुजारी मनोज शर्मा ने बताया की प्राचीन इतिहास में गांव में 8 द्वार का उल्लेख अष्टद्वार के नाम से मिलता है. अष्टभुजी माता का मंदिर और इस नगर के चारों ओर बने 8 विशाल दरवाजों की वजह से इसका प्राचीन नाम अष्टद्वार और धीरे-धीरे अपभ्रंश होकर इस गांव का नाम अड़भाड़ हो गया. आठ द्वारा के कारण ही अड़भाड़ गांव का नाम पड़ा है.

यह छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण तीर्थों में से एक है.अड़भाड़ गांव लगभग 07 किलोमीटर की परिधि में बसा यह नगर अपने आप में अजीब है. क्योंकि आज भी यहां के गांव के लोगों द्वारा जब भी कोई कार्य के लिए 150 से 200 मीटर की खुदाई किया जाता है तब किसी न किसी देवी देवता की मूर्तियां खण्डित अवस्था मिल जाती हैं. साथ ही भवन, घर बनाते समय खुदाई करने पर प्राचीन खंडित मूर्तियां या पुराने समय के सोने चांदी के सिक्के प्राचीन धातु के सामान मिल ही जाते हैं.

अरविंद तिवारी श्रद्धालु ने बताया की अड़भाड़ में मां अष्टभुजी मंदिर में दक्षिणमुखी प्रतिमा विराजमान है, मंदिर को पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किया गया है, पांचवी छठवीं शताब्दी के अवशेष इस स्थान पर मिलते हैं, मां अष्टभुजी आठ भुजाओं वाली हैं, यह बात तो अधिकांश लोग जानते हैं, लेकिन देवी के दक्षिण मुखी होने की जानकारी कम लोगों को ही है, मूर्ति के ठीक दाहिने और डेढ़ फीट की दूरी में देगुन गुरु की प्रतिमा योग मुद्रा में विराजे है, मां अष्टभुजी की प्रतिमा ग्रेनाइट पत्थर से बनी है, और बताया कि पूरे भारत में कोलकाता की दक्षिण मुखी काली माता और छत्तीसगढ़ में सक्ती जिले के अंतर्गत नगर पंचायत अड़भार की दक्षिणमुखी अष्टभुजी देवी के अलावा और कहीं भी देवी की प्रतिमा दक्षिणमुखी नहीं है, सिद्ध जगत जननी माता अष्टभुजी का मंदिर दो विशाल इमली पेड़ों के नीचे स्थित है.

सक्ती में मुंबई हावड़ा रेल मार्ग पर दक्षिण पूर्व की ओर 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अष्टभुजी माता का मंदिर प्रसिद्ध है लगभग 7 किलोमीटर की परिधि में बसे यहां हर 100 से 200 मीटर की खुदाई करने पर किसी न किसी देवी देवता की मूर्तियां मिल जाती है आज भी यहां लोगों को भवन बनाते समय प्राचीन टूटी फूटी मूर्तियों या पुराने समय के सोने चांदी के सिक्के प्राचीन धातु की कुछ ना कुछ सामग्री की अवशेष अवश्य मिलते हैं.

 

Lakheshwar Yadav

Office Add. - Link Road, Angel Sports Complex Janjgir, 495668 Mob.9755932150

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