
दंतेवाड़ा के छिंदनार में सचिन का खास दौरा, बच्चों के साथ खेलकर जीता सबका दिल, बोले—बस्तर में हीरे हजार, बस तराशने की जरूरत, 100 से ज्यादा खेल मैदान बनाने का दिया भरोसा…
- दंतेवाड़ा के छिंदनार में सचिन का खास दौरा
- बच्चों के साथ खेलकर जीता सबका दिल
- बोले- बस्तर में हीरे हजार, बस तराशने की जरूरत
- 100 से ज्यादा खेल मैदान बनाने का दिया भरोसा
छिंदनार गांव सचिन पहुँचे, बच्चों के साथ जमकर खेला, बोले यहाँ हीरे हजार है उन्हें हमारी टीम तराशेगी
दंतेवाड़ा के इन्द्रावती तट पर बसे छोटे से गांव में जब क्रिकेट के भगवान सचिन अपनी फैमिली के साथ पहुँचे तो पूरा खेल मैदान सचिन सचिन के नारों से गूंज गया. उनकी बेटी सारा तेंदुलकर और उनकी पुत्रवधु सानिया तेंदुलकर व मानदेशी की फाउंडर चेतना सिन्हा पहुँची हुई थी.सबसे पहले सचिन ने बच्चों के साथ रस्साकशी खेली जिसमे एक तरफ सचिन की टीम और दूसरी तरह उनकी बहु और बेटी थी। जिसमे सारा तेंदुलकर की टीम ने जीत हासिल की। फिर व्हालीबाल के मैदान में सचिन बच्चों के साथ जमकर खेलते नजर आये। उसके बाद पूरे मैदान का भ्रमण किया। जिन लोगो ने खेल मैदान बनाने में अहम किरदार निभाया उन्होंने सभी को सम्मानित किया। दंतेवाड़ा में 25 मैदान अभी तैयार है और 25 मैदान आगे बनाने की योजना है।सचिन ने मंच से कहा कि हम 50 नही 100 से अधिक मैदान बनाने में सपोर्ट करेंगे । मुझे यहाँ आकर बहुत खुशी हुई।

तेंदुलकर ने कहा कि – जब मुझे यह पता चला कि दंतेवाड़ा में खिलाड़ी है पर खेल मैदान नही है मुझे मेरा बचपना याद आ गया, मेरी जिंदगी की शुरुआत मैदान से ही हुई थी. मानदेशी फाउंडेशन और एसटीएफ (सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन) दोनो बहुत मजबूती से काम कर रहे है। मानदेशी फाउंडेशन ने जो यहाँ कर दिखाया मैं उससे बहुत खुश हूँ.बच्चों को जब मैं देखता हूँ मुझे मेरा बचपना याद आ जाता है.जब आप मैदान पर होते है,तो आपको सही गाईडेशन, सही कोचिंग की जरूरत होती है। मानदेशी फाउंडेशन आपको यही देगा। टीचरों को इस लेबल तक ट्रेनिग देंगे कि वे बच्चों को अच्छा खेल का नॉलेज दे सके। जब किसी के पास एनर्जी होती है तो उस एनर्जी को निकालना पड़ता है। बस्तर में बहुत से डायमंड है उन्हें निखारने की जरूरत है। यही खेलने कूदने की उम्र है इस उम्र में पढ़ाई भी करनी चाहिए.पर ये उम्र में दोस्त बनाने चाहिये.एक सच्चा जो दोस्त होता है उसमें दो क्वालटी होनी चाहिए एक आईना और दूसरा परछाई की दोस्ती क्योकि आईना कभी झूठ नही बोलता और परछाई कभी साथ नही छोड़ती उन्हें बचपने को याद करते हुए बताया कि मैं जब छोटा था मुझे बहुत सारी सलाह मिली पर सबसे महत्वपूर्ण सलाह मेरे पिताजी ने मुझे दी उन्हें कहा तुम्हारा क्रिकेट कैरियर कितने साल चलेगा उसके बाद तुम क्या करोगे तुम ऐसा काम करो कि लोग तुम्हे अच्छे इंसान के रूप में याद रखें, उसी प्रेरणा से आज मैं हर दिन यही प्रयास करता हूँ कि कुछ अच्छा किया जाये।




