
मजदूर दिवस पर विधायक का बड़ा ऐलान, गांधी प्रतिमा के सामने सत्याग्रह पर बैठेंगे ब्यास कश्यप, अनुदान में भेदभाव और रुके विकास कार्यों पर उठाए सवाल, “जनता के हक के लिए लड़ाई जारी रहेगी”..
- मजदूर दिवस पर विधायक का बड़ा ऐलान,
- गांधी प्रतिमा के सामने सत्याग्रह पर बैठेंगे ब्यास कश्यप
- अनुदान में भेदभाव और रुके विकास कार्यों पर उठाए सवाल
- “जनता के हक के लिए लड़ाई जारी रहेगी”
जांजगीर-चांपा:- विधायक ब्यास कश्यप ने 1 मई मजदूर दिवस के दिन जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने सत्याग्रह पर बैठने का ऐलान किया है, विधायक ने इसके पीछे पिछले दो वर्षों से लंबित जनहित के कार्यों और अनुदान राशि में कथित भेदभाव को मुख्य कारण बताया है,
विधायक ब्यास कश्यप का कहना है कि छत्तीसगढ़ में सरकार बनने के बाद से ही जनसंपर्क और स्वैच्छिक अनुदान के तहत जो राशि जनता के विकास कार्यों के लिए दी जानी चाहिए थी, वह आज तक सही तरीके से उपलब्ध नहीं कराई गई, उन्होंने बताया कि विधायक होने के नाते वे प्रस्ताव बनाकर कलेक्टर के माध्यम से शासन को भेजते हैं, लेकिन स्थिति यह है कि वे एक रुपये तक की राशि भी जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचा पाए हैं।
उन्होंने सीएसआर राशि का भी जिक्र करते हुए कहा कि इस विषय को उन्होंने विधानसभा में भी उठाया था। मंत्री के जवाब का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि गांवों के विकास के लिए जो कार्य प्रस्तावित किए गए थे, उन्हें समय रहते तकनीकी स्वीकृति के साथ पंचायतों के प्रस्तावों के जरिए कलेक्ट्रेट और वहां से ऊर्जा विभाग तक भेजा गया। उम्मीद थी कि 31 मार्च 2026 तक यह राशि स्वीकृत होकर मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
विधायक कश्यप ने आरोप लगाया कि जिन दो प्रस्तावों को स्वीकृति मिल चुकी थी, उन्हें भी बाद में निरस्त कर दिया गया, जबकि कुछ अन्य प्रस्ताव बिना तकनीकी स्वीकृति और बिना पंचायतों की अनुशंसा के आगे बढ़ा दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ये प्रस्ताव कब और किसकी सिफारिश पर भेजे गए, यह समझ से परे है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका विरोध किसी काम से नहीं है, बल्कि भेदभाव से है। उनका कहना है कि जो प्रस्ताव विधिवत प्रक्रिया से भेजे गए हैं, उन्हें ही रोका जा रहा है, जो कि गलत है। यदि लगातार ऐसे ही होता रहेगा, तो विधायक के हिस्से की राशि देने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि प्रभारी मंत्री द्वारा राशि- करीब 1 करोड़ 4 लाख रुपये- अपने स्तर पर वितरित कर दी जाती है, जबकि विधायकों की अनुशंसाओं को नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि भेदभाव ही करना है, तो विधायक मद की लगभग 2 करोड़ 96 लाख रुपये की राशि भी शासन अपने पास रख ले, ताकि जनता को उनसे कोई उम्मीद न रहे। ब्यास कश्यप ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर सचिव को पत्र लिखा है, साथ ही विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री को भी पहले पत्र भेज चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में अब उनके पास सत्याग्रह ही एकमात्र विकल्प बचा है।
उन्होंने कहा कि वे महात्मा गांधी के विचारों के अनुयायी हैं और उसी मार्ग पर चलते हुए गांधी जी की प्रतिमा के सामने शांतिपूर्ण सत्याग्रह करेंगे, उन्होंने यह भी कहा कि चाहे प्रशासन कुछ भी करे, वे जनता की आवाज उठाने के अपने अधिकार से पीछे नहीं हटेंगे, विधायक ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि “सबका साथ, सबका विकास” का नारा दिया जाता है, तो उसे जमीन पर भी लागू किया जाना चाहिए,
विधायक ब्यास कश्यप ने कहा की यदि वे जनता के हित में काम ही नहीं कर पाएंगे, तो विधायक पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं रह जाता, उन्होंने अंत में कहा कि 1 मई मजदूर दिवस के दिन एक विधायक, मजदूर बनकर गांधीजी की शरण में जाएगा और सत्याग्रह के माध्यम से जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ेगा।




