
जांजगीर-चांपा में विकास को लेकर सियासत तेज, प्रभारी मंत्री की बैठक न होने पर अकलतरा विधायक का बड़ा आरोप राघवेंद्र सिंह बोले- ढाई साल में नहीं हुई एक भी ठोस बैठक, ओ.पी. चौधरी पर औपचारिक दौरे का आरोप, “आते हैं और जूस पीकर लौट जाते हैं”…
- जांजगीर-चांपा में विकास को लेकर सियासत तेज, प्रभारी मंत्री की बैठक न होने पर अकलतरा विधायक का बड़ा आरोप
- राघवेंद्र सिंह बोले- ढाई साल में नहीं हुई एक भी ठोस बैठक, ओ.पी. चौधरी पर औपचारिक दौरे का आरोप, “आते हैं और जूस पीकर लौट जाते हैं”…
जांजगीर-चांपा:- जांजगीर-चांपा में विकास कार्यों की अनदेखी और प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर सियासत तेज हो गई है। आरोप है कि लंबे समय से प्रभारी मंत्री की बैठक नहीं होने और जनसमस्याओं की लगातार अनदेखी से पूरे जिले की स्थिति प्रभावित हो रही है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इससे विकास कार्यों की गति धीमी पड़ी है और जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
अकलतरा विधायक राघवेंद्र सिंह ने कहा कि विधायक व्यास कश्यप अपनी विधानसभा में हो रही अनदेखी और विकास कार्यों में देरी के विरोध में 4 मई को एक दिवसीय अनशन पर बैठे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक क्षेत्र की समस्या नहीं है, बल्कि अलग-अलग कारणों से लगभग सभी विधानसभाओं में ऐसी ही स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने आगे कहा कि यदि अकलतरा विधानसभा की बात करें तो वहाँ जनसंपर्क निधि कुछ हद तक मिल रही है, लेकिन प्रभारी मंत्री का दौरा अब तक नहीं हुआ है। वहीं पामगढ़ क्षेत्र में भी कुछ विकास कार्य चल रहे हैं, लेकिन कई आवश्यक कार्य आज भी अधूरे पड़े हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो लगभग हर विधानसभा में विकास कार्यों और प्रशासनिक सक्रियता को लेकर असंतोष का माहौल बना हुआ है।

विधायक राघवेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि इन समस्याओं को विधानसभा में कई बार उठाया जा चुका है। पत्राचार के माध्यम से और व्यक्तिगत रूप से भी अधिकारियों एवं जिम्मेदार लोगों को अवगत कराया गया है। इसके बावजूद लगभग ढाई साल बीत जाने के बाद भी प्रभारी मंत्री की एक भी ठोस बैठक नहीं हो पाई है। उन्होंने इसे जिले के इतिहास में पहली बार होने वाली स्थिति बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी प्रभारी मंत्री ओ.पी. चौधरी आते हैं, तो केवल औपचारिकताएँ निभाकर चले जाते हैं। वे अधिकारियों से कामकाज की जानकारी लेते हैं, जिस पर अधिकारी “सब ठीक है” कहकर स्थिति को सामान्य बताते हैं। मंत्री महोदय जूस पीते हैं और चले जाते हैं, इस दौरान न तो जनप्रतिनिधियों की भागीदारी होती है और न ही जनता की समस्याओं पर गंभीर चर्चा होती है, जिससे पूरी प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।
जन समस्या निवारण शिविर जैसे कार्यक्रमों में भी जमीनी स्तर पर संवाद की कमी साफ दिखाई देती है। उनका कहना है कि यदि जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुनी जाती, तो कम से कम जनता की समस्याओं को सीधे सुनना चाहिए। यही लोकतंत्र की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति केवल एक दल या एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। कई स्थानों पर जनप्रतिनिधि अपनी उपेक्षा को लेकर आवाज उठा रहे हैं। कहीं शिलान्यास में नाम नहीं होने पर विरोध हो रहा है, तो कहीं विकास कार्यों की अनदेखी पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि समस्या व्यापक है और सरकार की कार्यशैली पर लगातार प्रश्न उठ रहे हैं।

विकास कार्यों को लेकर किए जा रहे दावों पर भी उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जिले में कई बड़े कार्य पूर्व सरकारों के कार्यकाल में हुए हैं, जैसे हसदेव बांगो बांध का निर्माण, जिससे क्षेत्र के किसानों को व्यापक लाभ मिला। इसके अलावा अन्य योजनाओं और परियोजनाओं को लेकर भी जनता को वास्तविक स्थिति जानने का अधिकार है।
उन्होंने यह भी कहा कि अच्छी योजनाओं और सकारात्मक कार्यों का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन केवल कुछ चुनिंदा परियोजनाओं का बार-बार उल्लेख कर बाकी समस्याओं को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। आज भी बाईपास निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और स्थानीय स्तर के कई विकास कार्य अधूरे हैं। अंत में उन्होंने कहा कि वे लगातार इन मुद्दों को उठाते रहेंगे और जनता के हित में आवाज बुलंद करते रहेंगे। सरकार को चाहिए कि वह जमीनी हकीकत को समझे और जनप्रतिनिधियों तथा आम जनता के साथ समन्वय बनाकर समस्याओं का ठोस समाधान निकाले.




