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कनाईबंद में कोयला भंडारण पर लगे गंभीर आरोप: भूमि डायवर्जन, नक्शा अनुमोदन और विकास अनुज्ञा पर सवाल, जांच के बाद सामने आएगी हकीकत…

कनाईबंद में कोयला भंडारण पर उठे गंभीर सवाल: भूमि डायवर्जन, नक्शा अनुमोदन और विकास अनुज्ञा पर सवाल; जांच के बाद सामने आएगी हकीकत..

ग्राम कनाईबंद में संचालित कोयला भंडारण पर गंभीर सवाल,भूमि डायवर्जन में गलत जानकारी, नक्शे से छेड़छाड़ की आशंका; नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से अनुमति नहीं होने का दावा

 

जांजगीर-चांपा ग्राम कनाईबंद में नैला रेलवे अंडरब्रिज के पास संचालित मेसर्स मां शारदा लॉजिस्टिक्स प्रा.लि. का कोयला भंडारण अब सवालों के घेरे में है। खसरा नंबर 645/5 सहित अन्य खसरा नंबरों में संचालित इस कोल डिपो को लेकर उपलब्ध दस्तावेजों में भूमि डायवर्जन, विकास अनुज्ञा, नक्शा अनुमोदन और नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की अनुमति को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि खनिज विभाग ने 19 अगस्त 2025 को इस मामले में नौ बिंदुओं पर नोटिस जारी किया था। इसके बाद सामने आए दस्तावेजों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

 

नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की अनुमति पर सवाल: कार्यालय उप संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश क्षेत्रीय कार्यालय जांजगीर-चांपा के अभिमत के अनुसार ग्राम कनाईबंद निवेश क्षेत्र में शामिल है। ऐसे क्षेत्र में किसी भी प्रकार के विकास कार्य के लिए संबंधित विभाग से अनुज्ञा लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति किया गया निर्माण अथवा विकास कार्य अनधिकृत माना जा सकता है।

 

दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि संबंधित भूमि मार्ग के लिए आरक्षित है और उस पर विकास अनुज्ञा जारी किया जाना संभव नहीं है। इसके बावजूद आरोप है कि आरक्षित भूमि का डायवर्जन कराया गया और कोयला भंडारण की अनुमति हासिल कर ली गई।

 

1.503 हेक्टेयर की अनुमति, लेकिन भंडारण क्षेत्र पर सवाल: मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब 1.503 हेक्टेयर भूमि पर कोयला भंडारण की अनुमति होने के बावजूद मौके पर इससे कहीं अधिक क्षेत्र में कोयला भंडारण किए जाने की आशंका जताई जा रही है। यदि जांच में यह सही पाया जाता है तो यह निर्धारित अनुमति की सीमा और भूमि उपयोग के नियमों के उल्लंघन का मामला बन सकता है।

 

तहसीलदार की रिपोर्ट में भी उठे सवाल: न्यायालय तहसीलदार जांजगीर के प्रतिवेदन की कंडिका क्रमांक 20 में भूमि के नगर विकास योजना के अंतर्गत किसी प्रयोजन के लिए आरक्षित होने संबंधी जानकारी दर्ज नहीं होने का उल्लेख बताया जा रहा है। वहीं, 19 जुलाई 2019 के तहसीलदार प्रतिवेदन में भी भूमि को आरक्षित नहीं बताया गया है।

 

सवाल यह है कि जब नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के रिकॉर्ड में संबंधित क्षेत्र निवेश क्षेत्र के अंतर्गत आता है और भूमि के मार्ग के लिए आरक्षित होने की बात सामने आती है, तो राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित प्रतिवेदनों में यह जानकारी क्यों नहीं दिखाई गई?

 

राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट में अनुमति की कमी का उल्लेख: 3 अगस्त 2019 के राजस्व निरीक्षक प्रतिवेदन में सहायक संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश जांजगीर के 26 अप्रैल 2019 के पत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि संबंधित खसरा भूमि पर जांजगीर विकास योजना के अनुसार कृषि एवं मार्ग उपयोग के तहत कोल भंडारण उद्योग का प्रावधान नहीं है।

 

रिपोर्ट में विकास अनुज्ञा एवं नक्शा अनुमोदन उपलब्ध नहीं होने की बात भी सामने आती है तथा स्वीकृति से पूर्व नक्शा अनुमोदन एवं विकास अनुज्ञा प्राप्त किए जाने की आवश्यकता बताई गई है।

 

नक्शे से छेड़छाड़ की आशंका: पूरे मामले में अब नक्शे में हेरफेर या वास्तविक स्थिति को अलग तरीके से दर्शाए जाने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। साथ ही रेलवे से आवश्यक अनुमति लिए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

 

18 अगस्त को हुई जांच, रिपोर्ट का इंतजार: मामले को लेकर संचालक खनिज साधन संचालनालय/सीएमडीसी, नवा रायपुर में शिकायत की गई थी। शिकायत के आधार पर 18 अगस्त को जांच की कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन जांच की विस्तृत रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच टीम मौके पर वास्तविक भंडारण क्षेत्र, भूमि का सीमांकन, डायवर्जन, विकास अनुज्ञा, नक्शा अनुमोदन और संबंधित विभागों की अनुमति की स्थिति को लेकर क्या निष्कर्ष देती है।

 

अंडरब्रिज के सामने कोयला भंडारण, हादसे का खतरा: कोयला भंडारण और रेलवे अंडरब्रिज का मुख्य मार्ग आमने-सामने होने के कारण भारी वाहनों की आवाजाही भी लगातार बनी रहती है। ऐसे में सड़क सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आशंका जताई जा रही है कि भारी वाहनों की आवाजाही और अंडरब्रिज के आसपास की स्थिति दुर्घटना का कारण बन सकती है।

अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मेसर्स मां शारदा लॉजिस्टिक्स प्रा.लि. को जिस भूमि और क्षेत्रफल के लिए अनुमति मिली थी, उसी सीमा में कोयला भंडारण किया जा रहा है? क्या नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की विकास अनुज्ञा और नक्शा अनुमोदन लिया गया था? और यदि भूमि मार्ग के लिए आरक्षित थी तो उसका डायवर्जन किस आधार पर किया गया?

Lakheshwar Yadav

Office Add. - Link Road, Angel Sports Complex Janjgir, 495668 Mob.9755932150

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