
जांजगीर में सामूहिक दुष्कर्म मामले में बड़ा फैसला, चारों दोषियों को 20-20 साल की सख्त सजा, जुर्माना भी लगाया, नहीं भरने पर बढ़ेगी सजा, अपर सत्र न्यायाधीश का कड़ा रुख, न्याय की मजबूत मिसाल…
- जांजगीर में सामूहिक दुष्कर्म मामले में बड़ा फैसला, चारों दोषियों को 20-20 साल की सख्त सजा,
- जुर्माना भी लगाया, नहीं भरने पर बढ़ेगी सजा, अपर सत्र न्यायाधीश का कड़ा रुख, न्याय की मजबूत मिसाल...
जांजगीर जिले में सामूहिक दुष्कर्म के एक गंभीर और संवेदनशील मामले में न्यायालय ने कड़ा और उदाहरण प्रस्तुत करने वाला फैसला सुनाया है, माननीय मुकेश कुमार तिवारी , अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) जांजगीर ने चारों दोषियों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 70 (1) के तहत 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक आरोपी पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि दोषी अर्थदंड की राशि अदा नहीं करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त 1-1 वर्ष का सश्रम कारावास भुगतना होगा।
प्रकरण के संबंध में अभियोजन पक्ष की ओर से बताया गया कि घटना 18 मई 2025 की है, जब पीड़िता के घर पर परिचित लोगों के रूप में आए आरोपियों ने मौका पाकर समूह बनाकर उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता ने अपने परिजनों को आपबीती बताई, जिसके आधार पर 20 मई 2025 को थाना चांपा में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की और सभी आवश्यक साक्ष्य जुटाए।
जांच के दौरान पीड़िता एवं उसके परिजनों के बयान दर्ज किए गए, साथ ही घटनास्थल से भी महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए गए। विवेचना पूर्ण होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के दौरान कुल 13 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें पीड़िता, उसके परिजन एवं अन्य महत्वपूर्ण गवाह शामिल थे।
अभियोजन पक्ष की ओर से योगेश गोपाल ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी करते हुए बताया कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से समूह बनाकर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया है, जो समाज के लिए अत्यंत निंदनीय है, उन्होंने दोषियों को कठोर से कठोर सजा देने की मांग की।
सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों एवं प्रस्तुत तथ्यों का गहन विश्लेषण करने के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आरोपियों का अपराध संदेह से परे प्रमाणित हुआ है। इसके आधार पर न्यायालय ने चारों दोषियों को दोषसिद्ध कर कठोर सजा सुनाई।
यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, बल्कि समाज में अपराध के खिलाफ सख्त संदेश भी देता है कि ऐसे जघन्य अपराधों के लिए कानून में कठोर दंड का प्रावधान है और दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।



