
वन विभाग की कार्रवाई से उजड़े तीन गरीब परिवार, खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर, पीड़ितों ने यात्री प्रतीक्षालय में गुजारी रात, कार्रवाई पर गरमाई राजनीति, कांग्रेस-भाजपा दोनों ने उठाए सवाल, पुनर्वास के बिना बेदखली को बताया गलत…
- वन विभाग की कार्रवाई से उजड़े तीन गरीब परिवार, खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर,
- पीड़ितों ने यात्री प्रतीक्षालय में गुजारी रात, कार्रवाई पर गरमाई राजनीति,
- कांग्रेस-भाजपा दोनों ने उठाए सवाल, पुनर्वास के बिना बेदखली को बताया गलत
जांजगीर चांपा:- वन विभाग द्वारा शनिवार की सुबह मुड़पार गांव मे की गईं कार्रवाई से तीन परिवार बेघर हो गया है, बुजुर्ग महिला अपने टूटे घर के बाहर पेड के नीचे अपना सामान रख कर आशियाना की तलाश कर रही है वहीँ सुनीता ने यात्री प्रतीक्षालय मे रात गुजारा है, वन विभाग की इस कार्रवाई पर अब राजनीति भी गरमानें लगी है।

बम्हनीडीह थाना क्षेत्र के मुड़पर गांव मे वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने के नाम पर की गई कारवाई से तीन गरीब परिवार पर बड़ी समस्या खड़ी कर दी है, एक महिला अपने टूटे घर को देख कर आंसू बहा रही है तो एक महिला अपने घर मे वन विभाग द्वारा लगाए गए ताला को देख कर अपने परिवार के साथ रात गुज़ारने की चिंता सताती रही, महिला ने गांव मे बने यात्री प्रतीक्षालय मे अपने परिवार के साथ रात गुजारने को मजबूर रही।।

जांजगीर चाम्पा जिला के अफरीद मुड़पार गांव मे वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने मे नाम पर की गईं कार्रवाई पर राजनीति गरमानें लगी है, युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज शुक्ला ने इसे डीएफओ की मनमानी और तानाशाही रवैया बताया है और बिना पुनर्वास किए किसी को भी हटाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

वही भाजपा के जिला पंचायत उपाध्यक्ष गगन जयपुरिया ने वन विभाग की इस कार्रवाई को नियम विरुद्ध बताया, उन्होंने कहा कि डीएफओ 29 जून को भी अतिक्रमण हटाने के लिए पहुँचे थे, जिन्हे घर तोड़ने के बाद आने वाली समस्या के सम्बन्ध मे बता कर 6 माह बाद कार्रवाई के लिए समय निर्धारित करने के बाद फिर से दलबल के साथ अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंचने को अधिकारी की मनमानी बताया,और घर से बेदखल होने के बाद यात्री प्रतीक्षालय मे रहने को मजबूर महिला के परिवार को उसके घर मे रहने के लिए चाबी दिलाने का भरोसा दिलाया।।

वन विभाग की कार्रवाई को आम जनता के साथ साथ सभी राजनीतिक दल के जनप्रतिनिधि गलत बता रहे है, साथ ही वन विभाग की जमीन मे बने पीएम आवास निर्माण और अतिक्रमण के नाम पर तोड़ने को एक षड़यंत्र भी माना ज रहा है, शासकीय भूमि मे पीएम आवास कैसे बना और क्या अतिक्रमण से आवास तोड़े जाने के बाद उन हितग्राहियों को फिर से पीएम आवास का लाभ मिल पाएगा एक सवाल खड़ा हो गया है।।



