
क्यों मनाई जाती है धनतेरस और क्या है इसका पौराणिक महत्व, जानिए धनतेरस के पीछे क्या है वैज्ञानिक और ऋतु परिवर्तन का रहस्य….
Dhanteras 2025: धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी या धन्वंतरि त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है, दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व का प्रथम दिन है, यह पर्व हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। ‘धनतेरस’ शब्द ‘धन’ अर्थात् संपत्ति और ‘तेरस’ अर्थात् तेरहवें दिन से मिलकर बना है, यह दिन धन, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति के लिए समर्पित है, धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन आयुर्वेद और स्वास्थ्य की आराधना का भी विशेष महत्व है.
धनतेरस से जुड़ी पौराणिक कथाएं और मान्यताएं…
पहली कथा: पहली कथा के अनुसार इसी दिन समुंद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरी अमृत लेकर प्रकट हुए थे। यानि इस दिन मानव जाति को अमृत रूपी औषधि प्राप्त हुई थी। इस औषधि की एक बूंद व्यक्ति के मुख में जाने से व्यक्ति की कभी भी मृत्यु नहीं होती है।
दूसरी कथा : दूसरी कथा के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को रात्रि के समय पूजन एवं दीपदान (Deepdan kyon karte hain) को विधि पूर्वक पूर्ण करने से अकाल मृत्यु से छुटकारा मिलता है, इसमें दीपक और पूजन का महत्व बताया गया है।
क्या है धन तेरस का वैज्ञानिक कारण…अगर हम वैज्ञानिक दृष्टिकोण की बात करें तो पंडित बसंत महाराज के अनुसार यम देव ने संभवत एक ऐसे तेल का आविष्कार किया था, जिसका दीप बनाकर प्रयोग करने से उस दीप की लौ से निकलने वाले गैस को ग्रहण करने से अकाल मृत्यु (Akal Mtrityu se bachne ke upay) से व्यक्ति को छुटकारा मिलता था, अगर हम ध्यान दें तो इन दोनों कथाओं का संबंध व्यक्ति के स्वास्थ्य से है।
क्या है धनतेरस का ऋतुओं से संबंध… अगर हम इस त्योहार को सामान्य दृष्टिकोण से देखें तो हम पाते हैं कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तक वर्षा ऋतु समापन पर आ जाती है और इस दिन पूजा पाठ करने और दीपक जलाने से विभिन्न प्रकार के कीट पतंगे नष्ट होते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं.



