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15 साल बाद फिर वही दर्द, फिर वही लापरवाही, सक्ती बॉयलर ब्लास्ट में 16 मजदूरों की मौत से उठे सवाल, बालको हादसे जैसा दोहराया गया इतिहास, क्या इस बार तय होगी जिम्मेदारी या फिर मिलेगा सिर्फ इंतजार…?

  • 15 साल बाद फिर वही दर्द, फिर वही लापरवाही
  • सक्ती बॉयलर ब्लास्ट में 16 मजदूरों की मौत से उठे सवाल
  • बालको हादसे जैसा दोहराया गया इतिहास?
  • क्या इस बार तय होगी जिम्मेदारी या फिर मिलेगा सिर्फ इंतजार?

छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सक्ती जिले स्थित Vedanta Limited के पावर प्लांट में मंगलवार दोपहर हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट ने 16 मजदूरों की जान ले ली, जबकि 30 से अधिक श्रमिक गंभीर रूप से झुलसकर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। यह घटना डभरा थाना क्षेत्र के सिंघीतराई स्थित संयंत्र में उस समय हुई, जब रोज की तरह सामान्य कार्य जारी था।

दोपहर करीब 2 बजे अचानक हुए इस विस्फोट ने पूरे प्लांट को दहला दिया। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल और प्रशासन की टीम पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। कई घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब छत्तीसगढ़ में किसी बड़े औद्योगिक संयंत्र में इस तरह की भयावह घटना हुई हो।

 

15 साल पुराना जख्म अब भी ताजा: सितबर 2009 में कोरबा स्थित Bharat Aluminium Company Limited (बालको) के 1200 मेगावाट बिजली संयंत्र में निर्माणाधीन 110 मीटर ऊंची चिमनी गिर गई थी। इस हादसे में 40 से अधिक मजदूर मलबे में दबकर मौत के शिकार हो गए थे। उस समय भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी और निर्माण में लापरवाही के गंभीर आरोप लगे थे।

 

मामले में निर्माण से जुड़ी कंपनियां, जिनमें सेपको (SEPCO) और GDCL सहित कुल पांच कंपनियों को आरोपी बनाया गया। SEPCO के इंजीनियरों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज हुआ, लेकिन वे भारत छोड़कर चले गए और आज तक अदालत के सामने पेश नहीं हुए। करीब 15 वर्षों तक यह मामला अदालतों में उलझा रहा। वर्ष 2025 में जाकर कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए कंपनियों और उनके अधिकारियों को आरोपी बनाया, लेकिन अब तक न तो दोष तय हो सका है और न ही किसी को सजा मिली है।

 

सवाल वही—क्या मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं? बालको हादसे के पीड़ित परिवार आज भी न्याय का इंतजार कर रहे हैं। वर्षों से चल रही सुनवाई के बावजूद जब जिम्मेदारी तय नहीं हो पाई, तो अब सक्ती जिले की इस ताजा घटना ने फिर वही सवाल खड़ा कर दिया है—क्या मजदूरों की मौत यूं ही फाइलों में दबकर रह जाएगी?

 

वेदांता प्लांट में हुए इस हादसे के बाद भी शुरुआती जांच और बयानबाजी का दौर शुरू हो चुका है, लेकिन लोगों के मन में आशंका गहराती जा रही है कि कहीं यह मामला भी बालको हादसे की तरह लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझकर ठंडे बस्ते में न चला जाए।

 

जवाबदेही तय होगी या फिर इतिहास दोहराया जाएगा? विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक सुरक्षा मानकों की अनदेखी, निगरानी तंत्र की कमजोरी और दोषियों पर समय रहते कार्रवाई न होना ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति का बड़ा कारण है। जब तक जिम्मेदार कंपनियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक मजदूरों की सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित रहेगी।

सक्ती की इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन, न्याय व्यवस्था और उद्योग प्रबंधन के सामने कड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या इस बार 16 मजदूरों की मौत का जिम्मेदार तय होगा, या फिर यह मामला भी सालों तक अदालतों में भटकता रहेगा?

Lakheshwar Yadav

Office Add. - Link Road, Angel Sports Complex Janjgir, 495668 Mob.9755932150

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