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जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव के समापन में कुर्सी विवाद आरक्षित सीटों को लेकर सत्ता पक्ष और प्रशासन आमने-सामने, सांस्कृतिक मंच पर सियासी तकरार, उठे मर्यादा पर सवाल…
- जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव के समापन में कुर्सी विवाद
- आरक्षित सीटों को लेकर सत्ता पक्ष और प्रशासन आमने-सामने,
- सांस्कृतिक मंच पर सियासी तकरार, उठे मर्यादा पर सवाल…
जांजगीर में आयोजित जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव एवं एग्रीटेक कृषि मेला 2026 का समापन समारोह उस वक्त विवादों में घिर गया, जब आरक्षित कुर्सियों को लेकर सत्ता पक्ष के नेताओं और जिला प्रशासन के बीच तीखी बहस हो गई, तीन दिनों तक शांतिपूर्ण माहौल में चले इस महोत्सव के पहले दो दिन बिना किसी राजनीतिक बयानबाज़ी के संपन्न हुए, लेकिन 13 फरवरी दिन शुक्रवार को समापन समारोह के दौरान अचानक स्थिति बदल गई, मंच के सामने वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के लिए आरक्षित सीटों पर सत्ताधारी दल के कुछ स्थानीय नेता जाकर बैठ गए, आपत्ति जताए जाने पर मामला शांत होने के बजाय तूल पकड़ गया और देखते ही देखते सत्ता पक्ष के नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच खुली तकरार शुरू हो गई।
सबसे अहम बात यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम में विपक्ष कहीं नजर नहीं आया, आमने-सामने सत्ता पक्ष के ही नेता और जिला प्रशासन थे, वही मंच पर लोककलाकार आरू साहू का सांस्कृतिक कार्यक्रम जारी था, वहीं सामने सत्ता बनाम प्रशासन का सीधा टकराव दिखाई दे रहा था, इसी दौरान छत्तीसगढ़ की चर्चित लोक गायिका आरु साहू मंच पर अपनी प्रस्तुति दे रही थीं, लेकिन गीतों से ज्यादा चर्चा नेताओं की बहस की होती रही।

घटना पर जिला पंचायत अध्यक्ष सत्यलता मिरी और उपाध्यक्ष गगन जयपुरिया ने भी आपत्ति दर्ज कराई, आयोजन समिति लगातार समझाइश देती रही, लेकिन दर्शकों के बीच असहजता बनी रही, बाद में पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के पहुंचने पर स्थिति सामान्य हुई, लेकिन इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए, जब प्रशासन आयोजन को सफल बनाने में लगातार जुटा रहा, तो असंतोष होने पर भी सार्वजनिक मंच पर इस तरह का टकराव क्या जरूरी था?
तीन दिन तक चले इस जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव व एग्रीटेक कृषि मेला का अंत एक कड़वे संदेश के साथ हुआ—जब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग सार्वजनिक मंच की मर्यादा भूल जाते हैं, तो सवाल सिर्फ कुर्सी का नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति का भी बन जाता है।



