
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व: घर पर कैसे करें ऐसा स्नान जिससे सात तीर्थ और गंगा स्नान के समान पुण्य मिले, जानिए तिल-गुड़, खिचड़ी खाने की परंपरा और दान-पुण्य का पावन रहस्य…
जांजगीर-चांपा :- मकर संक्रांति का पावन पर्व 14 जनवरी को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं, जिसे देवताओं का दिन कहा गया है। इसी दिन से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं तथा खरमास समाप्त होने के साथ शुभ व मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है।
जांजगीर दुर्गा मंदिर के पंडित बसंत शर्मा महाराज ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन नदी या तीर्थ में स्नान कर सूर्य देव की पूजा और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। यदि कोई तीर्थ स्थल नहीं जा सकता, तो घर में स्नान करके भी गंगा स्नान के समान पुण्य प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए स्नान के पानी में थोड़ा तिल और गंगाजल मिलाकर, उस जल को स्पर्श करते हुए सात बार “गंगा-गंगा” (सप्त मोक्षदायिनी) का स्मरण कर स्नान करने से गंगा स्नान के बराबर पुण्य मिलता है।

पंडित जी ने बताया कि तिल, गुड़ और खिचड़ी खाने से स्वास्थ्य और पुण्य दोनों की प्राप्ति होती है। इस दिन तिल-गुड़ के लड्डू, चावल-दाल-सेमी, वस्त्र और अन्न का दान किया जाता है। तिल के लड्डू में सिक्का या आभूषण रखकर दान करने तथा तिल के पहाड़ के आकार का दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है।
उन्होंने सप्त मोक्षदायिनी का मतलब बताया की “अयोध्या मथुरा मायाकाशी कांचीत्वन्तिका, पुरी द्वारावतीचैव सप्तैते मोक्षदायिका” इसका अर्थ बताते हुए कहा- “अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांचीपुरम, उज्जैन और द्वारिका” इन सात तीर्थों के समान पुण्य मकर संक्रांति के विधिपूर्वक स्नान से प्राप्त होता है, इसी कारण इस दिन दान, स्नान और पुण्य कर्म का विशेष महत्व बताया गया है।



