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15 साल की जर्जर सड़क पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, मूसलाधार बारिश में पामगढ़ के अंबेडकर चौक पर चक्काजाम, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी आंदोलन में शामिल, यातायात प्रभावित, सीएम बोले- डोंगा-कोहरौद सड़क बजट में शामिल, निर्माण निश्चित होगा…
- 15 साल की जर्जर सड़क पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा,
- मूसलाधार बारिश में पामगढ़ के अंबेडकर चौक पर चक्काजाम,
- महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी आंदोलन में शामिल, यातायात प्रभावित,
- सीएम बोले- डोंगा-कोहरौद सड़क बजट में शामिल, निर्माण निश्चित होगा..
जांजगीर-पामगढ़:- जिले के डोंगाकोहरौद-बलौदाबाजार मार्ग की 15 वर्षों से जर्जर सड़क को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। सड़क निर्माण की मांग को लेकर पिछले पांच दिनों से आमरण अनशन पर बैठे ग्रामीणों ने आज शुक्रवार को तेज बारिश में भी पामगढ़ के अंबेडकर चौक पर चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मूसलाधार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क पर डटे रहे और सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
आंदोलन में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई और पूरे प्रदर्शन की कमान संभाली। उनके साथ स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और युवा भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। लगातार हो रही बारिश भी प्रदर्शनकारियों के हौसले को नहीं डिगा सकी। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से खराब सड़क के कारण उन्हें रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जिससे आवागमन के साथ-साथ विद्यार्थियों, मरीजों और किसानों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पिछले करीब 15 वर्षों से सड़क की हालत बदहाल बनी हुई है। कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के सामने सड़क निर्माण की मांग रखी गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक सड़क निर्माण की ठोस घोषणा नहीं होती और निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जाता, तब तक आमरण अनशन और आंदोलन दोनों जारी रहेंगे। उनका कहना है कि आंदोलन के पांच दिन बीत जाने के बावजूद जिला प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी वार्ता करने नहीं पहुंचा, जिससे लोगों में आक्रोश और बढ़ गया है।
वही ग्रामीणों ने आज पामगढ़ में बिलासपुर – शिवरीनारायण रोड पर चक्काजाम कर दिया है जिसके कारण यातायात प्रभावित है ,स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया, लगातार बारिश के बीच पुलिसकर्मी छतरी और रेनकोट पहनकर सुरक्षा व्यवस्था संभालते रहे और हालात पर नजर बनाए रखी। हालांकि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और ग्रामीण अपनी मांगों पर अडिग रहे। ग्रामीणों का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि क्षेत्र की मूलभूत सुविधा के लिए किया जा रहा है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण शुरू होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
वही कल 2 जुलाई को जांजगीर चांपा जिले दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा है कि “डोंगा-कोहरौद सड़क मेरे संज्ञान में है, बजट में शामिल हो चुकी है, निर्माण कार्य निश्चित रूप से पूरा किया जाएगा।”



