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नए साल पर आस्था का महासंगम : जांजगीर-चांपा के ये 6 चमत्कारी और प्रसिद्ध मंदिर, जहां दर्शन से मिलती है सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति…
जिले 6 प्रसिद्ध मंदिर, जहां दर्शन से होती है नए साल की शुभ शुरुआत..
- अगर आप भी अपने नए वर्ष की शुरुआत मंदिर जाकर भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना के साथ करना चाहते हैं, तो छत्तीसगढ़ के जांजगीर- चांपा जिले के ये प्रसिद्ध मंदिर विशेष आस्था केंद्र हैं, इन मंदिरों की अपनी अलग-अलग धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं हैं, जहां हजारों की संख्या में भक्त मंदिरों के दर्शन कर नए साल के लिए सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
- नहरिया बाबा: जांजगीर-नैला में स्थित नहरिया बाबा (हनुमान मंदिर) श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां विशेष रूप से नववर्ष के दिन हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं, नहर किनारे हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित होने के कारण इसे नहरिया बाबा कहा जाता है, नए साल की शुरुआत में जांजगीर सहित आसपास के जिलों से श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं, प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ होता है, साथ ही नववर्ष पर भंडारे और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है, मंदिर रेल्वे ट्रैक और नहर के पास स्थित होने से भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाते हैं। नहरिया बाबा मंदिर जांजगीर-नैला रेलवे स्टेशन से लगभग 300 मीटर दूर स्थित है.

- धार्मिक नगरी शिवरीनारायण: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की धार्मिक नगरी शिवरीनारायण को गुप्त प्रयाग कहा जाता है, यहां महानदी, शिवनाथ और जोक नदी का त्रिवेणी संगम है, यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य, आस्था, ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं से समृद्ध है तथा इसे भगवान जगन्नाथ का मूल स्थान और छत्तीसगढ़ का जगन्नाथपुरी भी माना जाता है, मान्यता है कि श्रीराम ने वनवास काल में यहां निवास किया और यहीं शबरी से भेंट कर उनके झूठे बेर खाए थे, यह स्थान भक्त और भगवान के अटूट संबंध का सजीव प्रमाण है, जहां आज भी दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान नारायण के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. यहां पहुंचने के लिए बिलासपुर से 65 किलोमीटर कार,बस से आ सकते है.

- मां चंद्रहासिनी देवी: छत्तीसगढ़ के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक मां चंद्रहासिनी देवी मंदिर सक्ती जिले के चंद्रपुर में एक छोटी पहाड़ी पर स्थित है, जहां माता 52 शक्तिपीठों में से एक के रूप में विराजमान हैं, चंद्रमा के आकार के कारण मां को चंद्रहासिनी या चंद्रसेनी कहा जाता है और मान्यता है कि यहां दर्शन से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा निःसंतान महिलाओं को संतान सुख प्राप्त होता है, महानदी और मांड नदी के बीच बसे चंद्रपुर की प्राकृतिक सुंदरता मंदिर की भव्यता को और बढ़ाती है, मंदिर परिसर में विशाल शिव-पार्वती प्रतिमा सहित अनेक पौराणिक झांकियां बनी हैं, वहीं चैत्र और क्वार नवरात्रि में 108 दीपों की महाआरती विशेष आकर्षण रहती है, नवरात्रि के साथ ही नए वर्ष में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

- श्री श्याम प्रेम मंदिर: जांजगीर के प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल श्री श्याम प्रेम मंदिर नववर्ष की शुरुआत के लिए श्रद्धालुओं का प्रमुख आस्था केंद्र है, राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर की तर्ज पर निर्मित यह मंदिर जांजगीर जिला मुख्यालय में खोखसा रेलवे ओवरब्रिज के पास स्थित है और वृंदावन के प्रेम मंदिर से प्रेरित है, 14 फरवरी 2022 को प्रेम दिवस के अवसर पर यहां प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी, मंदिर में श्री खाटू श्याम बाबा के साथ तिरुपति बालाजी, सालासर बालाजी, जीण माता, शिव-पार्वती, श्रीराम दरबार, राधा-कृष्ण और दुर्गा माता की प्रतिमाएं स्थापित हैं, यहां नियमित रूप से श्याम संकीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं, सुंदर नक्काशी और शांत वातावरण इस मंदिर को विशेष बनाते हैं. मंदिर जांजगीर नैला रेलवे स्टेशन से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां ऑटो और बस की सुविधा उपलब्ध है.

- लक्ष्मणेश्वर मंदिर: खरौद नगर में है ऐतिहासिक लक्ष्मणेश्वर मंदिर अपने आप में बेहद अद्भुत और आश्चर्यों से भरा है. इस शिवलिंग में सवालाख छिद्र है जिसमे से एक पातालगामी है जबकि एक छिद्र अक्षय कुण्ड है उसमे जल हमेशा भरा रहता है वही सवालाख छिद्र होने के कारण लखनेश्वर महादेव भी कहा जाता है.इस महादेव में सवालाख छिद्र होने के कारण सवालाख चावल चढ़ाने का विशेष महत्व है. लोग मनोकामना पूरा करने के लिए चावल के सवालाख दाने कपड़े की थैली में भरकर चढ़ाते हैं. इस चावल को लाख चाउर या लक्ष चावल भी कहा जाता है. इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं लक्ष्मण ने की थी. इसलिए लक्ष्मणेश्वर महादेव भी कहते हैं. वही खरौद के इस मंदिर को छत्तीसगढ़ का काशी भी कहा जाता है.

- बाबा कलेश्वरनाथ: जांजगीर-चांपा जिले के जिला मुख्यालय जांजगीर से लगभग 10 किमी दूर हसदेव नदी के पावन तट पर स्थित ग्राम पीथमपुर में भगवान कलेश्वरनाथ का प्राचीन और श्रद्धा से परिपूर्ण मंदिर है, जहां जिले ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, मान्यता है कि सच्चे मन से भगवान कलेश्वरनाथ की आराधना करने से नि:संतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है, यहां महाशिवरात्रि पर यहां भव्य मेला लगता है, वही नए साल के अवसर पर आध्यात्मिक शांति, आस्था और प्रकृति के सान्निध्य का अनुभव लेने के लिए बाबा कलेश्वरनाथ धाम का दर्शन कर सकते है।




